माता पिता – इस लेख मे माता के दबाव कारण वे खुदके के सपने को पूरा नहीं कर पाते, आगे जनेगें कि क्या माता पिता बच्चों के ऊपर दबाव डलना साही या गलत, साथ ही उनके ऊपर क्या फर्क पडता है, वह भी जनेंग ।

माता पिता, क्यों बच्चों के ऊपर दबाव न डालें
माता पिता, क्यों बच्चों के ऊपर दबाव न डालें

खुशियाँ कौन नहीं चहता पर किस हल मे, जिन्दगी कि पलके ओर खूबशूरात हो जाती है, जब शादी शुदा जोंडों को जिने का अशाय मिल जाता है  । बच्चे कि खुशी मे हम अपना सारी खुशीयाँ बच्चों में ही दिखाई देने लगता है । बच्चे कि खूशी देख के वे खूश रहेने लगते है, बच्चे कि छोटी सी हँसी पूरे पीवार मे खूशियाँ ले आती है ।

लेकिन किसी को बच्चे इस वजह  से नहीं बच्चे चाहिए, बल्कि ईसीलिए चाहिये  ताकि बुढापे के समय हमारी आच्छे से देख भाल करे और बडे हो के हमारी नाम रोशन करे । ये सोच भी साही है लेकिन किसी किसी बच्चों के ऊपर बहुत भारी पड जाता है । बच्चे तो रख लेते हैं उनकी उम्र बढने लगती है, उनकी सोच मे बादलाओ आने लगतें हैं  । जब बच्चा बडा हो जाता है, अपने से कुछ करना चहता है, अपना सपना को पूरा करना चहता है तो उसके कार्य मे रुकावट बन्ने कि कोशिस करते हैं, यानी कि बच्चा जो काम करना चाहता है, तो उसे रोक दिया जाता है । बच्चे को एकाग्रता करने कि वाजय उसकी रुकावट बनके खडे हो जाते है ।

आज भी ऐसे बहुत सारे माता पिता हैं जो अपने बच्चों को वैसे काम करने के लिए कहतें हैं जो कि बच्चा को उस काम मे इंट्रेस्ट ही नहीं है, लेकिन वह ईसीलिए काम करता क्योंकि वह अपने माता पिता के खूशी के लिए काम मे लग जाता है । लेकिन कुछ दिनों के बाद पाता चालता है कि, वह उस काम को ठिक से कर नहीं पाता है, उसे काम मे जाने का मन नहीं करता आदि ।

 अगर आप किसी कि माता पिता है, आपका बच्चा 10वीं कक्षा मे 60% से अधीक नम्बर लेके पास हुआ है तो उसे जबरजस्ती न करे कि वह विज्ञान या वाणिज्य लेने कि, उसे खुद अपनी पसंद कि विषय लेने दें । मन लिया आप के कहने पर वह आप के पसंद के विषय ले लिया, लेकिन वह उसमे आच्छा नहीं कर पयेगा । क्योंकि जो काम नहीं करना चाहता है उसे अगर जबरजस्ती करके करवाया जाय तो, उस मैदन मे जित हासील नहीं के बराबर होगा ।

 बच्चे, बच्चे ही होते हैं, हर किसी को, बनाने वाला ने अलग-अलग बनाया है और हर कोई अलग करने के लिए इस दुनिया मे आये हैं । ईसीलिए उन्हे वही काम करने दे जो कि वे करना चाहते हैं । उदाहरण के तौर पर – जे.सी.बी. वाहन जामीन के खुदाइ के लिए बनाया गया है, न कि लोगों को बस कि तरह सवारी के लिए ।

हाँ आप देख सकते है, यहाँ थोडा सा ध्यान रखे कि जो काम वह कर रहा है, वह गलत तो नहीं हैं और उस काम से उसकी भविष्य तो खरब नहीं हो जायेगी । पहले देख लें परख लें उसके बाद समझाना, नहीं समझाना आप के ऊपर है । अगर आप उसके काम मे गलत दिखाई दे रहा तो उसे, उसके कार्य से गलत करार देते हुए, उसे काह सकते हैं ।

 साही दिशा देखाने मे उसकी मदद करे और हर एक आच्छा काम जो उसके लिए आच्छा और उसे उस काम में खूशी मिलता है, और वह करना चाहता है, उसके कार्य मे रुकावट डाल रहें हैं तो, ये आप के बुढापे समय के लिए सबसे बडा खतरा, आप अपने लिए बाना रहें हैं । ईसीलिए बेटे अपने पाता पिताओं का बृधाश्राम मे छोड देते हैं, क्योंकि हर एक काम जो कि वह करना चाहता था उसके कार्य मे एक रुकावट उसके लिए, आप माने जायेंगे ।

हलांकि हर बच्चे ऐसे नहीं करते हैं और हर किसी के साथ ऐसी घाटना नही के बराबर होता है, लेकिन पिछले कुछ सालों मे अधीक मात्रा मे माता पिता को बृधातश्राम में छोड के चाले जाते है । जो बच्चों के कार्य में अत्याधिक मात्रा मे रुकावट उनके माता पिता डाल रहे थे ऐसा स्थिती में माता पिताओं को बच्चे गलत मन्ने लगता है, जो कि बच्चा काम करना वह चाहता था, उसके मदद मे सहायता नहीं मिली होती है ।

माता पिता, क्यों बच्चों के ऊपर दबाव न डालें
माता पिता, क्यों बच्चों के ऊपर दबाव न डालें

कई बार तो बात यहाँ तक भी आ जाती है उस काम को माता पिता के बार बार माना करने कि वाजह से बच्चे घऱ से भाग जाते हैं, यह घटना सालों से होते आ रहे हैं  । और जो बच्चा अपने मेहनात से कुछ बाडा बान जाता है तो वह अपने माता पिता को नहीं के बराबर मनता है । ठिक से देख भाल नहीं करता और बुढापे मे उन्हे बृधाश्राम मे छोड के चला जाता है । लेकिन हर लडका वैसा नहीं होता है, जो कि अपने माता पिता को बृधाश्राम छोड दे । 

हलांकि यह बातें पहले जमाने के लोगों के लोगों मे पाये जाते थे  । वर्तमान समय तो सब कुछ बच्चों के हाथों मे है बच्चे जो कहते हैं, वही काम करते हैं,  क्योंकि दुनिया आधुनिक हो रहा है, दुनिया बहुत आगे निकाल चुका है । 

अगर आज आप भी उन्ही लोगों मे से हैं, जो पुराने सोच को आज के जिन्दगी मे लागू करना चाहते है । थोडा सा सोच लिजीए पुराने (1980-2000 ई.) जमाने मे लोग 5000 रु. मे पूरा महीना चाल जाता था, आज घर चला के देख लिजीए चला सकते हैं तो । हम उन्हे कहना चाहूँगें कि कृपया अपने बच्चों के लिए एक बार कोशिस करे कि सुधारने कि, क्या पता इसे आप कि जिंदगी बादल जाये ?

 निष्कार्ष- ऊपरी लेख बच्चों के ऊपर दबाव न डालें, के अनुसार अपने बच्चों के जबरजस्ती दबाव नहीं डलना चाहीये बल्कि, उन्हे जो बनना चाहते है और जो पसंद है उसे ही काम करने देना चाहिये । बच्चा जो काम कर रहा हो उस काम मे उसके गलत रास्ता चुनाव है तो साही दिशा देखाने के हाक माता पिता होता है ।

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