रिलेशनशिप के प्रकार, दुनिया मे कई सारे संबध पाये जाते हैं, जो उनसे जुडी हुई होती है, कहते हैं किसी के साथ संम्बध जोडने के बाद किसी ओर को देखने का इरादा बादल जाता है, वह जनेंगे कि कैसे रिलेशनशिप में इसी तरह कि संबधे पाई जाती है, और कैसे रिलेशनशिप नहीं पाई जाती है ।

रिश्तों के प्रकार

इस अकल्पानिक दूनिया मे, रिलेशनशिप के अन्नेकों प्रकार है । पर आज हम 9 प्रकार के रिलेशनशिप के बारें मे जनेंगे, जो कि हमें आस पास के लोगों मे दिखाई देते है । आज जो रिलेशनशिप के प्रकार के बारे में जन्ने वालें है, हो सकता कई तो इन 9 रिलेशनशिप मे से कईओं मे जुडें हुये है, या फिर कई रिलेशनशिप से तो कोई वाकित ही नहीं हुये होंगे । 9 रिलशनशिप के बारे मे जन्ने से पहले हम रिलेशनशिप को पहचान लेते है कि आखिर रिलेशनशिप को हिंदी मे क्या कहते हैं ? रिलेशनशिप को हिन्दी मे संबध, नतेदारी, आदी से जाना जाता है ।

इस लेख मे रिलेशनशिप के 9 प्रकार को बताया गया है, जो शायद आस पास के लोगों मे पाया जाता है । जो ये हैं-

  1. परीवार वाला रिलेशनशिप

शादी शुदा महीला पुरूष तथा उनके अविवाहिक बच्चे एक साथ एक छत के निचे रहते हैं, उस्से परीवार कहा जाता है ।

परीवारिक रिलेशनशिप परीवार के एक एक सदस्य के रिलेशनशिप को दर्शाता है । जो माता अपने अपने बच्चो के प्रती, पिता भी अपने बच्चो के प्रती तथा उनके बच्चे अपने माता पिता कि प्रती अपने हृदय मे गभींर रुप से प्रेम भवना रखते हों, तो यह परिवारीक रिलेशनशिप मे परीवार के सदस्यों मे जो एक दूसरे को प्रेम, चिंता, एक दूसरे कि मदत करना ही परीवार रिलेशनशिप है । उदाहरण स्वारूप- अगर परीवार के कोई सदस्य कहीं दूर जा रहा है, और जा रहे सदस्य से ज्यादा, उसके परीवार वाले चिंतीत होते है कि साही सलामत पहुंचेगा कि नहीं, परेशान तो नहीं हो जायेगा, इसी तरह कई चिंन्ता परीवार मे दिखाई देता है तो उनमे साफ साफ परीवार संबध दिखाई दे रहे हैं । परीवार के दो प्रकार होते है-

  • एकाल परीवार-

जिस परवार में पती पत्नि और उनके अविवाहिक बच्चे या फिर 4 से कम सदस्यता पाई जाती है उस्से एकल परीवार कहा जाता है ।

  • संयुक्त परीवार-

यह परीवार एकल परीवार से मिलके बाना होता है, जिस परीवार मे 4 सदसय्यों से ज्यादा सदस्य एक साथ एक ही छत के निचे रहते हों उस्से संयुक्त परीवार कहा जाता है । जैसे- माता, पिता, उनके माता, पिता, उनके बच्चे, चाचा, चाची, चाची चाची के बच्चे, पिता के छोटे बडे भाई आदि ।

  1. प्रेम वाला रिलशनशिप

कहा जाता है कि प्यार दो शब्दों से मिलके बना है, प् + यार । प्- जिसका मतलब होता है पाना, यार- दोस्त इनके मिलन से ही प्यार बना है । प्यार का सही रुप जिंदगी के सफर के लिये एक यार ( दोस्त ) को पाना होता है । प्यार के संबध मे जूडने के बाद कई ईंसान बुरे से आच्छे इन्सान बन जाते है और कई आच्छे इंसान से बुरे इन्सान बन जाते है । प्यार एक ऐसा नाशा है जिसके चढने के बाद उतारने का नाम ही नहीं लेता । एक दूसरे बारे मे न चाहते हुये भी, सोचने के लिये मजबूर करती है, मिलना जुलना किस्स, चुंबान यही किसी किसी के मन मे तो बार बार खयाल आते रहते है । प्यार सबध मे अच्छाई बुराई के साथ अन्नेकों प्रकार आते हैं जैसे-

रिलेशनशिप के प्रकार | रिश्तों के प्रकार हिन्दी में

  • एक तरफा प्यार
  • संबध वाला प्यार
  • सच्चा वाला प्यार
  • न मिलने वाला प्यार 
  • दोस्ती वाला प्यार
  • खुदका प्यार
  • पप्पी वाला प्यार
  • सोचने वाला प्यार
  • धोखा वाला प्यार
  • अंधा वाला प्यार आदि,

इसी तरह कि अन्नेको प्रकार प्यार संबध मे पाया जाता है ।

  1. दोस्त वाला रिलेशनशिप

एक व्यक्ति किसी ओर व्यक्ति कि बिना वाजह मदत करता है, या उनके साथ वक्त बिताता है, एक दूसरे के साथ रहते है उस्से दोस्त वाला रिलेशनशिप कहा जाता है । शायद ही ऐसा होगा जिस्से दोस्ती का अहमियत नहीं पता होगा । दोस्ती रिलेशनशिप प्रेम रिलेशनशिप से कफी मिलता जुलता है । फर्क इतना है कि उनके साथ हम जिंदगी भार एक साथ एक ही छत के निचे नहीं राह सकते । बाकि सबकुछ है, प्यार, एक दूसरे को अपने दिल कि बाते बताना, एक दूसरे कि मदत करना, बिछाडना, हांसना, यादें, सूख दुख बाँटना आदि होता है । और इसमे  सच्चा वाला दोस्ती और धोखा वाला दोस्ती दो भागो मे विभाजीत है –

  • सच्चा वाला दोस्त-

वो दोस्त जो हर मुसिबात मे आप के साथ रहता है, आप जो अपने मन कि बातें भरोसा करके बाताते है, उस्से किसी ओर को नहीं बताता हो, वह भी आप को अपने दिल कि बात बताता हो, सूख दोनो मे साथ देता हो वह है सच्चा वाला दोस्त ।

  • धोका वाला दोस्त-

वो दोस्त चुगली करता हो, वह इसीलिये दोस्त है, अपनी काम आप को करवा साके, मुसिबातों मे साथ छोड देता है आदि ।

जिस्से भी दोस्त बनाये तो देखें कि अच्छाई बुराई मे कौन से गुण है, ये सब देखे तब जा के दोस्ती करें ।

रिलेशनशिप के प्रकार | रिश्तों के प्रकार हिन्दी में
रिलेशनशिप के प्रकार | रिश्तों के प्रकार हिन्दी में
  1. न दिखने वाला रिलेशनशिप

अलौकिक शक्ति तथा उनमे विश्वास करने वाले लोगो के बीच के संबध को न दिखने वाला रिलेशनशिप कहते है । यह एक ऐसे संबध है, जो कि किसी को दिखाई नहीं देता, न हीं आवाज सुनाई देता है, सिर्फ भवनाओं से सबंध है । इस अकल्पानिक धरती पर जी रहे इंसान अपने विस्वास अलौकिक शक्ति के साथ वर्तलाप करने हेतु, या फिर अपने संबध को बनाये रखने के लिये इंसान अन्नेको प्रकार से बातें करता है । कोई सूबाह करता है, कोई दोपहार को करता है, कोई सप्ताह मे एक बार करता है, कोई रोज करता है । वह अपने हिस्साब से ही करता है, अपने विस्वास अलौकिक शक्ति से बातें करता है, । यह रिलेशनशिप इंसान कई युगों से करते आ रहा है, और जब तक इंसानी जीवन समप्त नहीं होगा तब तक अलौकिक शक्ति तथा इंसान के बीच के संबध बना रहेगा ।

  1. पडोसी परीवार वाला रिलेशनशिप

एक परीवार को अपने पडोसी परीवार से, संबध हो या फिर एक दूसरे के परीवारों के तकलिफों मे दोनो परीवार साथ मदद करते है या फिर एक दूसरे का तकलिफ समझ के बाँटवारा करते हैं तो यह पडोसी परीवार संबध मे आता है ।

ऐसे परीवार जिनमे पडोसी परीवार से आत्ती प्रेम हो दोनो परीवार एक दूसरे से प्रेम करते हो । एक दूसरे के तकलिफे अपना समझ के वे एक दूसरे के मदद करते हैं । वे रहते तो अलग अलग घरों मे पर उनमे एक परीवार जैसे एकता दिखाई देती हो, अलग अलग परीवार मे राह के भी वे एक परीवार मे रह रहे जैसे रहते है तो वह पडोसी  परीवार सबंध मे आता है ।

  1. मेहमान वाला रिलेशनशिप

एक परीवार को अपने दूर परीवार वाले से प्रेम, लगाव हो, उन्हे मेहमान रिलेशनशिप कह सकते है  । जैसे हमारे माता के छोटे बडे भाईओं को हम मामा काह के पूकारते है, माता कि माता पिताओं को नानी नाना काह के पुकारते हैं । वैसे कई उदाहरण है मेहमान रिलेशनशिप के इसीलिय आदि कहना ही बेहतार होगा ।

  1. लोगो वाला रिलेशनशिप

गाँव के सदस्यों या शहर के सदस्य उनमे अगर एक दूसरे का मे संबध पाया जाता है तो वह लोगों वाला रिलेशनशिप मे आता है  ।

गाँव हो या शहर अगर सदस्यता मे संबध दिखाई दे, या फिर एक दूसरे के प्रति प्रेम की भवना तथा एक दूसरे के लिये मदद की भवना जगती है । वर्तमान समय अन्नेको दुर्घटनायें सून्ने के मिलता है या दिखाई देता । अगर वैसे स्थिती मे आंजन इंसान गंभीर घायल या हलात मे पाते है,  उन्हे मदद कि अवश्यता है और उसका मदद करते है तो मदद करता मे साफ झलकती है कि उसमे लोगों वाला रिलशनशिप है ।

  1. बाजार वाला रिलेशनशिप

इस दुनिया मे हर रोज अन्नेकों दुकान्दर के अन्नेको खरीदार बनते है, या फिर पहले से ही होते है । जब कोई खरीदार एक ही दुकान्दर के पास अपनी अवश्य्कता वस्तु खरीदने के लिये उन्ही के पास जाता है तो उनमे बाजार वाला रिलेशनशिप बन जाती है । कई दुकानदार पहचान वाला सोच कई प्रतीशात छूट करके खरीदार को वस्तु दे देते है । लेकिन बाजार रिलशनशिप मे जब तक दुकान्दर तब तक खरीदार करने वाला ये नहीं रहता । खरीदार करने वाला को सुविधा चाहीये, जहाँ उस्से ज्यादा सुविधा मिलती है, वह उसके पास जाता है, पहले वाला को छोड दुसरे बाजार रिलशनशिप मे जूड जाता है, बाजार रिलेशनशिप बाजारु है ।

  1. जीव वाला रिलेशनशिप

इंसान और पशु पक्षीओं के बीच मे जो संबध पाया जाता है, उस्से जन्तु वाला रिलेशनशिप कहा जाता है । वैसे इंसान भी एक जंतु है पर उसके बुध्दी सोचने के क्षमता कि वाजह से वह अलग हो गया । अक्सर आप ने ऐसे इन्सान को देखा होगा जो कि पशु पक्षीओं से बहुत लगाव रखता है । कोई कोई तो अपने पास पशु पक्षीओं को रख लेते है, जैसे बिल्ली, कुत्ते आदि जनवार को अपने साथ रखते है । कोई अपने शौक के लिये रखते है किसी- किसी को तो सचमे पशु पक्षीओं से बहुत लगाव रहता है । अगर कोई वैसे दिखाई देता है वह जन्तु वाला रिलेशनशिप मे है ।

निष्कार्ष ऊपरी लेखित सभी लेखों से यह स्पष्ट होता है कि रिलेशनशिप के  कई प्रकार होते है, जो कि इंसान को एक दूसरे से आलग आलग मध्यम से मिलाती है ।_____ The End__

 

रिलेशनशिप के प्रकार शरांस 

रिलेशनशिप के प्रकार, दुनिया मे कई सारे संबध पाये जाते हैं, जो उनसे जुडी हुई होती है, कहते हैं किसी के साथ संम्बध जोडने के बाद किसी ओर को देखने का इरादा बादल जाता है, वह जनेंगे कि कैसे रिलेशनशिप में इसी तरह कि संबधे पाई जाती है, और कैसे रिलेशनशिप नहीं पाई जाती है ।

रिश्तों के प्रकार

इस अकल्पानिक दूनिया मे, रिलेशनशिप के अन्नेकों प्रकार है । पर आज हम 9 प्रकार के रिलेशनशिप के बारें मे जनेंगे, जो कि हमें आस पास के लोगों मे दिखाई देते है । आज जो रिलेशनशिप के प्रकार के बारे में जन्ने वालें है, हो सकता कई तो इन 9 रिलेशनशिप मे से कईओं मे जुडें हुये है, या फिर कई रिलेशनशिप से तो कोई वाकित ही नहीं हुये होंगे । 9 रिलशनशिप के बारे मे जन्ने से पहले हम रिलेशनशिप को पहचान लेते है कि आखिर रिलेशनशिप को हिंदी मे क्या कहते हैं ? रिलेशनशिप को हिन्दी मे संबध, नतेदारी, आदी से जाना जाता है ।

इस लेख मे रिलेशनशिप के 9 प्रकार को बताया गया है, जो शायद आस पास के लोगों मे पाया जाता है । जो ये हैं-

  1. परीवार वाला रिलेशनशिप

शादी शुदा महीला पुरूष तथा उनके अविवाहिक बच्चे एक साथ एक छत के निचे रहते हैं, उस्से परीवार कहा जाता है ।

परीवारिक रिलेशनशिप परीवार के एक एक सदस्य के रिलेशनशिप को दर्शाता है । जो माता अपने अपने बच्चो के प्रती, पिता भी अपने बच्चो के प्रती तथा उनके बच्चे अपने माता पिता कि प्रती अपने हृदय मे गभींर रुप से प्रेम भवना रखते हों, तो यह परिवारीक रिलेशनशिप मे परीवार के सदस्यों मे जो एक दूसरे को प्रेम, चिंता, एक दूसरे कि मदत करना ही परीवार रिलेशनशिप है । उदाहरण स्वारूप- अगर परीवार के कोई सदस्य कहीं दूर जा रहा है, और जा रहे सदस्य से ज्यादा, उसके परीवार वाले चिंतीत होते है कि साही सलामत पहुंचेगा कि नहीं, परेशान तो नहीं हो जायेगा, इसी तरह कई चिंन्ता परीवार मे दिखाई देता है तो उनमे साफ साफ परीवार संबध दिखाई दे रहे हैं । परीवार के दो प्रकार होते है-

  • एकाल परीवार-

जिस परवार में पती पत्नि और उनके अविवाहिक बच्चे या फिर 4 से कम सदस्यता पाई जाती है उस्से एकल परीवार कहा जाता है ।

  • संयुक्त परीवार-

यह परीवार एकल परीवार से मिलके बाना होता है, जिस परीवार मे 4 सदसय्यों से ज्यादा सदस्य एक साथ एक ही छत के निचे रहते हों उस्से संयुक्त परीवार कहा जाता है । जैसे- माता, पिता, उनके माता, पिता, उनके बच्चे, चाचा, चाची, चाची चाची के बच्चे, पिता के छोटे बडे भाई आदि ।

  1. प्रेम वाला रिलशनशिप

कहा जाता है कि प्यार दो शब्दों से मिलके बना है, प् + यार । प्- जिसका मतलब होता है पाना, यार- दोस्त इनके मिलन से ही प्यार बना है । प्यार का सही रुप जिंदगी के सफर के लिये एक यार ( दोस्त ) को पाना होता है । प्यार के संबध मे जूडने के बाद कई ईंसान बुरे से आच्छे इन्सान बन जाते है और कई आच्छे इंसान से बुरे इन्सान बन जाते है । प्यार एक ऐसा नाशा है जिसके चढने के बाद उतारने का नाम ही नहीं लेता । एक दूसरे बारे मे न चाहते हुये भी, सोचने के लिये मजबूर करती है, मिलना जुलना किस्स, चुंबान यही किसी किसी के मन मे तो बार बार खयाल आते रहते है । प्यार सबध मे अच्छाई बुराई के साथ अन्नेकों प्रकार आते हैं जैसे-

 

  • एक तरफा प्यार
  • संबध वाला प्यार
  • सच्चा वाला प्यार
  • न मिलने वाला प्यार 
  • दोस्ती वाला प्यार
  • खुदका प्यार
  • पप्पी वाला प्यार
  • सोचने वाला प्यार
  • धोखा वाला प्यार
  • अंधा वाला प्यार आदि,

इसी तरह कि अन्नेको प्रकार प्यार संबध मे पाया जाता है ।

  1. दोस्त वाला रिलेशनशिप

एक व्यक्ति किसी ओर व्यक्ति कि बिना वाजह मदत करता है, या उनके साथ वक्त बिताता है, एक दूसरे के साथ रहते है उस्से दोस्त वाला रिलेशनशिप कहा जाता है । शायद ही ऐसा होगा जिस्से दोस्ती का अहमियत नहीं पता होगा । दोस्ती रिलेशनशिप प्रेम रिलेशनशिप से कफी मिलता जुलता है । फर्क इतना है कि उनके साथ हम जिंदगी भार एक साथ एक ही छत के निचे नहीं राह सकते । बाकि सबकुछ है, प्यार, एक दूसरे को अपने दिल कि बाते बताना, एक दूसरे कि मदत करना, बिछाडना, हांसना, यादें, सूख दुख बाँटना आदि होता है । और इसमे  सच्चा वाला दोस्ती और धोखा वाला दोस्ती दो भागो मे विभाजीत है –

  • सच्चा वाला दोस्त-

वो दोस्त जो हर मुसिबात मे आप के साथ रहता है, आप जो अपने मन कि बातें भरोसा करके बाताते है, उस्से किसी ओर को नहीं बताता हो, वह भी आप को अपने दिल कि बात बताता हो, सूख दोनो मे साथ देता हो वह है सच्चा वाला दोस्त ।

  • धोका वाला दोस्त-

वो दोस्त चुगली करता हो, वह इसीलिये दोस्त है, अपनी काम आप को करवा साके, मुसिबातों मे साथ छोड देता है आदि ।

जिस्से भी दोस्त बनाये तो देखें कि अच्छाई बुराई मे कौन से गुण है, ये सब देखे तब जा के दोस्ती करें ।

  1. न दिखने वाला रिलेशनशिप

अलौकिक शक्ति तथा उनमे विश्वास करने वाले लोगो के बीच के संबध को न दिखने वाला रिलेशनशिप कहते है । यह एक ऐसे संबध है, जो कि किसी को दिखाई नहीं देता, न हीं आवाज सुनाई देता है, सिर्फ भवनाओं से सबंध है । इस अकल्पानिक धरती पर जी रहे इंसान अपने विस्वास अलौकिक शक्ति के साथ वर्तलाप करने हेतु, या फिर अपने संबध को बनाये रखने के लिये इंसान अन्नेको प्रकार से बातें करता है । कोई सूबाह करता है, कोई दोपहार को करता है, कोई सप्ताह मे एक बार करता है, कोई रोज करता है । वह अपने हिस्साब से ही करता है, अपने विस्वास अलौकिक शक्ति से बातें करता है, । यह रिलेशनशिप इंसान कई युगों से करते आ रहा है, और जब तक इंसानी जीवन समप्त नहीं होगा तब तक अलौकिक शक्ति तथा इंसान के बीच के संबध बना रहेगा ।

  1. पडोसी परीवार वाला रिलेशनशिप

एक परीवार को अपने पडोसी परीवार से, संबध हो या फिर एक दूसरे के परीवारों के तकलिफों मे दोनो परीवार साथ मदद करते है या फिर एक दूसरे का तकलिफ समझ के बाँटवारा करते हैं तो यह पडोसी परीवार संबध मे आता है ।

ऐसे परीवार जिनमे पडोसी परीवार से आत्ती प्रेम हो दोनो परीवार एक दूसरे से प्रेम करते हो । एक दूसरे के तकलिफे अपना समझ के वे एक दूसरे के मदद करते हैं । वे रहते तो अलग अलग घरों मे पर उनमे एक परीवार जैसे एकता दिखाई देती हो, अलग अलग परीवार मे राह के भी वे एक परीवार मे रह रहे जैसे रहते है तो वह पडोसी  परीवार सबंध मे आता है ।

  1. मेहमान वाला रिलेशनशिप

एक परीवार को अपने दूर परीवार वाले से प्रेम, लगाव हो, उन्हे मेहमान रिलेशनशिप कह सकते है  । जैसे हमारे माता के छोटे बडे भाईओं को हम मामा काह के पूकारते है, माता कि माता पिताओं को नानी नाना काह के पुकारते हैं । वैसे कई उदाहरण है मेहमान रिलेशनशिप के इसीलिय आदि कहना ही बेहतार होगा ।

  1. लोगो वाला रिलेशनशिप

गाँव के सदस्यों या शहर के सदस्य उनमे अगर एक दूसरे का मे संबध पाया जाता है तो वह लोगों वाला रिलेशनशिप मे आता है  ।

गाँव हो या शहर अगर सदस्यता मे संबध दिखाई दे, या फिर एक दूसरे के प्रति प्रेम की भवना तथा एक दूसरे के लिये मदद की भवना जगती है । वर्तमान समय अन्नेको दुर्घटनायें सून्ने के मिलता है या दिखाई देता । अगर वैसे स्थिती मे आंजन इंसान गंभीर घायल या हलात मे पाते है,  उन्हे मदद कि अवश्यता है और उसका मदद करते है तो मदद करता मे साफ झलकती है कि उसमे लोगों वाला रिलशनशिप है ।

  1. बाजार वाला रिलेशनशिप

इस दुनिया मे हर रोज अन्नेकों दुकान्दर के अन्नेको खरीदार बनते है, या फिर पहले से ही होते है । जब कोई खरीदार एक ही दुकान्दर के पास अपनी अवश्य्कता वस्तु खरीदने के लिये उन्ही के पास जाता है तो उनमे बाजार वाला रिलेशनशिप बन जाती है । कई दुकानदार पहचान वाला सोच कई प्रतीशात छूट करके खरीदार को वस्तु दे देते है । लेकिन बाजार रिलशनशिप मे जब तक दुकान्दर तब तक खरीदार करने वाला ये नहीं रहता । खरीदार करने वाला को सुविधा चाहीये, जहाँ उस्से ज्यादा सुविधा मिलती है, वह उसके पास जाता है, पहले वाला को छोड दुसरे बाजार रिलशनशिप मे जूड जाता है, बाजार रिलेशनशिप बाजारु है ।

  1. जीव वाला रिलेशनशिप

इंसान और पशु पक्षीओं के बीच मे जो संबध पाया जाता है, उस्से जन्तु वाला रिलेशनशिप कहा जाता है । वैसे इंसान भी एक जंतु है पर उसके बुध्दी सोचने के क्षमता कि वाजह से वह अलग हो गया । अक्सर आप ने ऐसे इन्सान को देखा होगा जो कि पशु पक्षीओं से बहुत लगाव रखता है । कोई कोई तो अपने पास पशु पक्षीओं को रख लेते है, जैसे बिल्ली, कुत्ते आदि जनवार को अपने साथ रखते है । कोई अपने शौक के लिये रखते है किसी- किसी को तो सचमे पशु पक्षीओं से बहुत लगाव रहता है । अगर कोई वैसे दिखाई देता है वह जन्तु वाला रिलेशनशिप मे है ।

निष्कार्ष ऊपरी लेखित सभी लेखों से यह स्पष्ट होता है कि रिलेशनशिप के  कई प्रकार होते है, जो कि इंसान को एक दूसरे से आलग आलग मध्यम से मिलाती है ।

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