हमारे स्कूलें, हर माता पिता का सपना यही होता है कि उनके बच्चे पाढ लिख के आच्छे से कम्पानी मे काम करे । लेकिन यह सम्भवना तभी हो सकता है, जब बच्चे एक आच्छे स्कूल मे पढके, आच्छे नोलेज सिख के और समय को बचाना सिखले । लेकिन वर्तमान समय मे भारत मे ऐसे व्यक्तिगत स्कूल खोल लिया गया है, जो कि अपना स्कूल जल्दी से जल्दी नाम हो जाये इस वाजह से स्कूल के बच्चो को किताबों के केवल प्रश्न, उत्तर रटा के पास करने के लिए मजबूर कर रही है ।

हमारे स्कूलें, क्या भारत मे ऐसे होना चाहीए
हमारे स्कूलें, क्या भारत मे ऐसे होना चाहीए

प्राईवेट स्कूल का नाम सूनते ही आप के दिल मे बहुत बडा सोच पैदा हुआ होगा । कुछ प्राईवेट स्कूल का मकसद सिर्फ यही रहता है, कि स्कूल का नाम जल्दी से जल्दी बडा हो जाए और लोग जाने । ईन स्कूलो के पढाने के तारिके अगर आप मे से कोई प्राईवेट स्कूल में पढे हैं, यह प्राईवेट स्कूल से निकाल चुके हैं तो आप जानते ही होंगे कि पढाई कैसे? किस तरह होती है ?  स्कूल के हर शिक्षक कि सोच रहता है कि बच्चे अपने वर्तमान जीवन को भूला के किताबों मे लिखे बातों रटे,सब विषय को पढे, तकि जैसे-तैसे बेडा पार है जाये और पार हो के वह जो कुछ भी करे उसे कोई मतलब नहीं, यही सोच ही होती है । ईसीलिए चाहते है कि बच्चे 6 के 6 विषय का अध्यायन करे, अगर एक शिक्षक 6 के 6 विषय पढा नहीं सकता तो बच्चे से क्यों उम्मिद करते हैं कि वह 6 के विषय को पढे ।

शिक्षक क्लाश के  आंदर घूसे वैसे ही कोपी पेन निकालो और लिखना शुरू करो, जब तक न रुकूं लिखते जाओ । अगर लिखने मे किसी कारण छूट जाये तो दोबारा अगर पुछा जाये तो वे भडक जाते है । उन्हे सिर्फ सिलेवस कम्प्लिट करना होता है, बच्चा समझे यह न समझे इस्से कोई फर्क नहीं पडता । ये कोई पढाने के तारिकें है, अगर भाषान करते तो वो अलग बात होती, पर बिना समझाये आंधा धूंद लिखवाना ये कहाँ का पढाने का तारिका हैं ।

हमारे स्कूलें, क्या भारत मे ऐसे होना चाहीए
हमारे स्कूलें, क्या भारत मे ऐसे होना चाहीए

कुछ स्कूलों के पढाने के तारिके, बच्चा आगे जाके कुछ बाने या न बने चाहे वह JCB कि खुदाई देखे या गोब्बर बेचे इन बातों से इन्हे कोई फर्क नहीं पडता ।  उन्हे तो सिर्फ अपना स्कूल का नाम चाहिए । कुछ-कुछ स्कूलों मे तो ऐसा नियाम हैं कि अगर लडका लडकी दोस्ती के स्वारुप बात करते स्टाप के किसी मेंबर ने देख लिया तो उस दिन वे लडका लडकिओं का आखरी दिन स्कूल में । यह तो स्कूल के अंदर कि बात है लेकिन वही स्कूल के लडका लडकी बाजार या बस स्टोप मे बातें करते स्कूल के किसी स्टाप ने देख लिया तो उस समय थोडा सा जानकारी निकालने कि वाजय । स्कूल मे उन विय्धार्थीओं को स्कूल के विय्धार्थीओं के बिच वेइज्जाती किया जाता या स्कूल से निकाल देने कि धमकी भी दी जाती है । स्कूल के समय अगर लडका लडकी बात कर रहे हैं, तो मतलब यह नहीं कि वे वही वाजह से बात करते हैं । वे बहुत आच्छे दोस्त भी तो हो सकते है । अगर बात भी करते हैं तो क्या फर्क पडता है । क्योंकि यही समय  जीवन का एक यादगर बनाने का मौका रहता है । जो कि प्राईवेट स्कूल के शिक्षक बच्चों के सबसे खस पल को मिटा देते हैं । इस वाजह से पछतावा पूरी जींदगी भर रहती है ।

कभी आप ने सोचा है कि प्राइवेट स्कूल, कोलेज के शिक्षक अपने बच्चों को दूसरा स्कूल पढने के लिए क्यों भेजते हैं ? आप सोचतें होंगे उनके पास बहुत सारे रुपये रहता हैं ईसीलिए । नहीं वे जनते हैं कि उनके स्कूल  मे किस तरह पढाया जाता है ? अगर विय्धार्थीओं को इतना ही ज्यादा शिक्षा दी जाती है तो अपने स्कूल मे अपने बच्चों अपने ही क्यों नहीं पढाते हैं ? बहुत कम शिक्षकों के बच्चे अपने स्कूल मे पढतें हैं ।

हमारे स्कूलें, क्या भारत मे ऐसे होना चाहीए
हमारे स्कूलें, क्या भारत मे ऐसे होना चाहीए

अगर आप मे से कोई ऐसे माता पिता  हैं  और अपने बच्चे के पढाई के लिए प्राईवेट स्कूल सोच रहे हैं, तो जिस स्कूल मे अपने बच्चे का दाखिला करना चाहते हैं । उस स्कूल के बारे मे थोडा पूछताछ कर ले । उस स्कूल से निकले विय्धार्थीओं से, उस स्कूल के शिक्षक या किसी स्टाप से पुछने का गलती न करे, क्योंकि वे तो अपने स्कूल को अच्छा ही बतायेंगे । बाद में पछतायेंगे आपके बच्चे का, अगर किसी कारण भविष्य खरब हो जाये तो, खरब होने का जिम्मेदार  अपने आपको ठहरायेंगे । प्राईवेट स्कूलो के सूविधा केवल न देखे, उनके पढाने के तरिके भी देखें, कहीं जिस स्कूल मे आप अपने बच्चों को पढाना चाहते हैं, उस स्कूल के शिक्षक विय्धार्थीओं को आत्मा हत्या करने के लिए तो मजबूर तो नहीं करते हैं । 

 इस लेख  के व्दारा किसी भी प्राइवेट स्कूल, सराकारी स्कूल, कोलेज को इंगीत नहीं किया गया है । हलांकि सभी प्राइवेट स्कूल, कोलेज एक जैसा नहीं होता है । कोई –कोई स्कूल,कोलेज बहुत आच्छे भी होते हैं, और बहुत सारे सुविधायें उपलब्ध कराने के साथ, उनके पढाने के तारिका भी बहुत आच्छा होता है । चुनावी आपके ऊपर निर्भार करता है ।

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