Galti se mistake:- कई बार हमसे कई अन्नेकों galti se mistake हो जाती है । कई लोग ऐसे होते है जो कि उस गल्ती को सुधारने का सोचते है और कई देख के पार हो जाते हैं । लेकिन बाद में उनके सामने ऐसे कुछ हो जाती है जिसे कि उस समय उस गल्ती का समना करना पड सकता है । या फिर कहने का मतलब यह हैं कि आपकी गलती आपको दिखाई नहीं देता तो, वे खुद आपको कहते है कि आपसे ये,ये गलती हो चुकी है जिसे सुधारने कि अवश्यक्ता है । जिन्दगी कि उस सफर में चलते वक्त हमसे जो गल्तीयाँ हो जाता है उस गल्ती को कैसे सुधारें, जो बाद में परेशानी पैदा न करें ।

शायद किसी के लिये अपने आपको सुधारना मुश्किल होगा, पर जिस कार्य को करने कि ठन ले तो उस काम को करना मुश्किल नहीं होता । बस शुरूआत करने  कि अवश्यक्ता होती है और लगातर उस काम मे धर्य रखना होता है । एक बात हमेशा याद रखें मुश्किलें तब आसान होती है जब उस मुश्किल से लडते है, तब जा के वह मुश्किल आसान हो जाता है । लडेंगे नहीं तो हमारे लिए वह मुश्कलें एक दिक्कत पैदा कर सकती है जिसे बाद मे पछताना पाड सकता है । क्योकि उस समय न आपके आगे लोग रहते है, न ही पिछे अकेले हो जातें है वैसा स्थिती तक देखना पाड सकता है ।

ईसीलिये जब अपने अंदर कोई बदलाव लाना चाहते है, तो उस काम को बार-बार करने कि अवश्यक्ता है । अगर आप लगातर उस काम को करते रहे तो 15 16 दिन के बाद अपने आपको देखने पर आपको बहुत बदला हुआ पायेंगे । उसके बाद लगातर करते रहेंगे तो, लोग कहेगे कि आप मे बहुत बदलाव आ गया है, उसके बाद आपको रोकने वाला कोई सामने नहीं दिखेगा ।

Galti se mistake
Galti se mistake

कहा जाता है कि गल्ती ही सफलता का जड होता है जिसके बाद जा के सफलता को छु पाते है । ये बहुत साही पर सफलता तब मिलती है, जब उस गलती को सुधारते है । हम कुछ केंद्र को पकडे है जो कि लोग जिंदगी के सफर में चलते वक्त गल्तीआं कर जाते है, पर वे गलती को नाजर आंदज कर देते है । उनके नाजर आंजद करने बाद वे खुदको सवाल करते है, कि सफलता तक क्यों नहीं पहुंच पा रहे । यह गलती न करें इसीलिये यह लेख आपके सामने हैं, आगे जनकारी पुरी ले, उसके बाद नहीं कहेंगे कि सफलता आप मे नहीं है ।

क्या है आपकी गलतियाँ, कैसे सुधारें

1 अपनी गलती न मन्ना

माना कि हर कोई अपना गलती नहीं मनते पर ऐसे भी कई लोग हैं जो कि अपना गलती को अपना समझ के वे अपना गलती मन लें लेते है । कहा जाता  है कि अपना गलती मन्ना समझदारी का प्रतीक है, वे अपनी गलती मन के किसी से मूं बिना लढांये निकाल जाते है जिस्से उनमे किसी प्रकार कोई झगडा नहीं निकालता । हलाँकि अजकाल तो ऐसा हो गया है कि गलती मनते हुये भी सामने वाला बात को पतंगर कर देता है, लेकिन उनसे मूँ न लढायें नहीं तो आपकी गलती ओर भी गहरी गढा मे चाली जायेगी । सामने वाला जो बोले अपना गलती को स्विकार, कर निकाल जायें, क्योंकि समझदारी का प्रतीक ही आपकी जिन्दगी को आगे ले जाने में मदद करेगी ।

उदाहरण के तौर पर मन लिया जाये, आनजानें मे आपसे गलती हो गई और आप उनसे अपना गलती होते हुए भी मूं लडेंगे तो हो सकता वही गलती बहुत बडा दुश्मानी में बादल जाये, जिसके बाद भविष्य में आप तथा आपके परीवार को नुकसान उठाना पाडे ।

2 माफी न मंगना

माना कि हर कोई सिने चौडा करके चलना चाहते है, इस भिड भडाका जिन्दगी के सफर में और किसी के भी निचे झूकना नहीं चाहते । पर हमारे सामने कई ऐसे गलती हो जाते है जिसके बाद हमें किसी के सामने झूकना पडना ही पडता है । क्योंकि यही समझदारी है, कि किसी को बहुत ईज्जात कर रहे हो या दे रहे हो । अपना गलती आपना मन कर जिसके साथ भी हुई हो उनसे माफी मांगले और सामने वाला इतना कठोर नहीं होगा कि आपके माफी को नकार दें । अगर नकार दे तो, गुस्सा न होयें, क्योंकि ये एक आच्छा तारीका है, जिसे आप अपनी गलती की माफी मंगते है ।

2 गलती कि जड को न खोजना

अगर आप ऐसे शख्स हैं जो, बहुत दिन साल बित गया फिर भी काम में आपने सोचा । उस काम में सफलता नहीं मिली है तो आपसे कोई बहुत बडीं गलती हुई होगी । जिसके वाजह से आपको सफलता नहीं मिल रही, अगर सफलता को पाना चहते हैं तो आपको गलती कि जड को ढूंडना होगा । जब उस जड को नहीं ढूंडेगें तब तक आप अपनी गलती को नहीं देख पायेंगें, कि आखीर गलती कि शूरूआत कहाँ से हो रही है और कहाँ खतम होगी । इसीलिये गलती कि जाड को ढूंडे और उस गलती कि जड को निकालें, नहीं तो बाद मे फिर से वही जड आपकी रुकावट बन सकती है ।

3 बिना सोचे कदम उठालेना

गलती के अहसास होने के बाद, आप फिर से वही गलती न कर जायें, ईसीलिये आप सोचे उसके बाद कदम उठायें । एक बार की गलती के बाद दोबारा वही गलती को दहराना बहुत बडी समस्य हैं, माना कि अचनाक से होने वाला गलती को कोई नहीं रोक सकता पर आपको पता है या पहले से जनकारी है कि वह काम, मैं करुगा तो मुझसे गलती हो जायेगी । अगर आपको लग रहा है कि वही गलती दोहराने जा रहा हैँ तो आपको वह काम न ही करें तो बेहतार होगा । क्योकि बार बार गलती करना ईंसान के लिये बहुत बडी समस्या है और बार बार कोई माफी भी नहीं देता । अपने आपकी गलती को रोक सकते है कुछ देर के सोचने के बाद ईसीलिये पहले सोंचें उसके बाद कदम उठांये ।

4 समाधान न निकालना

हर किसी के पास समाधान नहीं होता और समाधान का बाजार भी कहीं नहीं है कि आप बाजार जाओं और समाधान खरीद के ले आओ । या किसी को अपना समाधान निकालने को कहेंगे तो भी कुछ समाधान तो अपने ही अंदर से निकालना पडता है । अगर हमारे पास परेशानी है तो उसका भी समाधान है, बार बार गलतीयाँ हो रही है तो उसका भी समाधान है । समाधान हमारे अंदर होता है बस हमें निकालने कि अवश्यक्ता है कि, जो गलती जो हमसे बार बार हो रही है, उसका समाधान कहाँ है? अपने अंदर मे छिपे समाधान को निकाले और अपनी किसी समस्या मे लगायें ।

8 अलस्य को अपने अंदर रखना

अपनी गलती कि कई लोग तो ग्रह को दोष देने लगते है, कि ये ग्रह मेरे ऊपर, निचे चारो तरफ घूम रहा है । इस वाजह कई अपने काम मे अलसी हो जाते है और अपनी गलती को सुधारने कि वाजय, ग्रह, तारा को दोष देने लगते हैं । आपकी ही मन लिजीये, ग्रह के छोटे से स्थान के छोटे से किडे है, इतना विशाल ग्रह आपके उपर कैसे चाढ सकता है । ये सब एक नाटक है, जो कि सफर के रुकावट को बढावा देती है, ग्रह को दोष न दे, वे अपने स्थान पर है और अपने स्थान पर चाल रहे है । आलस्य न बाने अपनी गलती का समना या सुधार करें । क्योंकि अलस्य ही मनुष्य का सबसे बडा शत्रु है ।

Galti se mistake
Galti se mistake

6 अपना काम जारी न रखना

जिस काम मे अगर बार बार गलती हो रही है, तो भी आप उस काम मे हार न मनते हुये । उस काम को जारी रखें । जारी रखना जरूरी है, क्योंकि सफलता कि चोटी तक बार बार गलती को  सुधार के जारी रखने से ही पहुंचती है । याद रखें, गलती को सुधारने से सफलता मिलती है, नहीं सुधारने पर वही गलती बार बार दोहराया जा सकता है । गलती को सुधारते हुये काम को जारी रखे, इसी कारण आपकी गलती करने कि चांस कम हो जायेंगे, शायद बाद मे वही गलती दोहराने का मौका कम हो जायेगा ।

9 लक्ष्य निर्धारित न करना

हर ईंसान को लक्ष्य निर्धारीत करना बहुत जरुरी होता है, निर्धारित करने पर पहले से रास्ते के आधे मोंडो के बारे में जान लेते है । बिना रास्ता निर्धारित यें जो चलता है बाद में रास्ता नहीं मिलने से ईंसान भटक चलता है । लक्ष्य अगर निर्धारित करके चलेंगे तो आपसे अगर कोई भी गलती हो जाती है तो भी आपमे उठने का हिम्मात आयेगा जिसे आपकी लक्ष्य को छूने में मदद करेगी ।

10 समय बर्बाद करना

जिन्दगी सबकी होती है, समय भी उतनी ही मिलती है जितना कि, उसे मिलना होता है । लेकिन हर किसी को समय लम्बा नहीं मिल पाता अपने जिंदगी को लम्बा जिने के लिए । हम वैसे ही इस दुनिया मे कदम नहीं रखें है, कुछ न कुछ वाजह होगा जिसे लोगो से बहुत अलग कर सकते है । समय न बर्बाद करते हुये अपने जिंदगी को जियें,क्योंकि समय बर्बाद करना एक ईंसान के लिये बहुत बडीं गलती है । क्योंकि समय ही धन ही है, अगर धन को ही बर्बाद कर देंगे तो हमारे पास बाद मे कुछ नहीं रहता केवल पछताने के  । समय बर्बाद न करें, कुछ तो होगा जिसे आप ओरो से बहुत अलग कर सकते हैं ।

11 लगातार प्रयास न करना

कई बार लोग लगातर प्रयास के बाद जब निचे गिर जाते हैं, तो और ऊपर चढने का नाम नहीं लेते । एक बार गिरने के बाद दोबारा चढना मुश्किल हो जाता है ऐसा सोच के कारण ही लोग बहुत बडी गलती कर जाते हैं । जिसे वे कुछ दिन पहले मुश्किल लग रहा था, वह कोई ओर कर देता है तो उसे देख पछताना पड सकता है । गिरना बहुत जरूरी है, क्योंकि कोई भी बिना गिरे ऊपर नहीं पहूंच सका है, एक बार गिरने के बाद उसे पता चाल जाता है, कि वह रास्ता फिसलन है । अगली बार जब चढता है, तैयार करके जाता है वह पार हो जाता है, लगातार प्रयास करें क्योंकि यही है आपकी गलती सुधारनने, कि आपको गिर के ऊठा सकते हैं ।

12 गलतीओं से न सिखना

कहा जाता है कि जिंनदगी भार हमारे लिये स्कूल ही है, जो कि हर गलती से जो ईंसान एक सिख सिखता है, वही निकाल पाता है । अपनी छोटी छोटी गलतीओं को नाजर आंदज न करें, क्योंकि गलती ही हमे सिखाने कि  कोशिस करती है कि हम अपने काम मे क्या गलती कर रहे है जिसके कारण आगे निकाल नहीं पा रहें । गलतीओ को नाजर आंदज न करें, जो सिख दे रही है, उसको अपनायें ताकि आपके जिन्दगी के सफर मे वह गलती दोबारा न हो जाये ।

13 किताबें न पाढना

जिन्दगी में अगर अपने आप मे आने वाले भविष्य तथा काल के लिये कुछ बदलाव लाना चाहते है तो महान हस्तीओं के लिखी हुई किताबें जरुर से पढें । क्योंकि वे महान लोग अपने जिन्दगी के बिते कठीयों तथा मेहनात को लिखे होते है जो कि अपने बिते काल मे सामने महसूस किये होते है  । अपने जीवन के बिते काल को उस किताब मे लिख देते है, अगर वे किताब मे सारी वे अपने जिन्दगी कि बिते पल को लिखे होते है, अगर पूरे किताब को पाढते है तो आपको आधा कठीनाईयाँ तो आपके साथ भी हो सकता है और उस कठीनाईओं का पता पहले ही चाल जयेगा जिसके बाद आपको समना करने मे थोडा आसान हो जायेगी । जरूर से पढें नही तो समझ में नहीं आयेगा कि उस कठिनाई का समना कैसें करें ?

14 झूट बोलना

झूट बोलना तो गलती ही है, पर जनते हुये भी लोग झूट बोलते हैं । हाँ अगर मौत सामने है, तो बचाव के लिय़े झूट बोल सकते हैं । झूट न बोलना अपने आप मे एक पहचान है कि आप किस तरह के ईंसान है? कैसे लोगो के बीच मे रहते हैं । आज काल लोगो को धोखा मिल जाता है तो जान के पिछे पाड जातें है, किसी को झूठा प्यार न करें किसी से झूठा दोस्त न करें । यानि कि काम निकालने वाला न बनें, एक नेक और आच्छा ईंसान बनें । आज काल जो बहुत फेमस हो के चाल रहा, माता पिता को दिखाते है कि पाढ रहे है । पर किताब में मोबाईल छिपा के ग्रुप में बकवास(चैट) कर रहे होते है या फिर गेम खेल रहे होते है,  ऐसा झूठा पढाई न दिखायें क्योंकि इसका रिजल्ट परीक्षा लिखते वक्त पता चलता है, कि ये बहुत बडी गलती होती है, जिसके कारण जिन्दगी के दरवाजा एक साल के लिय बाँद हो सकते है । अगर ऐसा गलती हो रही तो सुधारें, नहीं तो हमेशा के लियें जिन्दगी के दरवाजे बाँद हो सकते हैं ।

Galti se mistake
Galti se mistake

15 अपने आप मे खूश न रहना

आज काल लोगो मे एक नाशा चाढ गया है कि लडकी मे ही लबकुछ होता है । दिल के साथ मेरी खूशियां ले गई है, उसके मिलने के बाद ही मेरी खूशि आ आयेगी । यह सोच के चौड मे जा के उस लडकी को अपने दिल कि बात बताते है । जब वह ईंकार कर देती है तो वे अपनी खूशी को भूला के भोसडा उदास कर लेते हैं । वे नहीं सोचते कि अपने मे भी खूश रहा जा सकता है, शायद ईसीलिये ये कहावत है, जो दूसरे में खूशियाँ ढूंडता है, वह अपनी खूशी को ही भूला जाता है । ऐसा नहीं करे, क्योंकि आप अपने आप मे भी खूश रह सकते हैं । दूसरो मे खूशियाँ ढूडगेंतो तो शायद बाद में आपके लियें, सबसे बडी गलती शाबित न हो जायें । पहले अपने आपमें खूशी देखें उसके बाद दूसरो का में ढूंडे ।

17 जिम्मेदारी न लेना

कई लोग मोबाईल से सिख रहें है, कई मोबाईल से बिगाड रहें है । जिम्मेदारी शायद ही किसी को दिखाई दे रही हो, पर जो जिम्मदारी को जल्दी पकड लेता है । वह कहाँ से कहाँ तक ले जाता है, अपनी जिम्मेदारी दूसरो पर न डालें नहीं बाद मे  बहुत बडी समस्य निकला सकती है । क्योंकि जिम्मेदारी बाद मे आ जाने के  बाद समझ मे ही नहीं आयेगा की कैसा गलती का समना किया जाये । नहीं आता कि जिम्मेदारी को कैसे निभायें । जब जिम्मदारी मिलती है तो अपना समझ के ले लें ताकि जिम्मेदारी का आदत हो जाये । नहीं तो बाद के लिये आपके सबसे बडी गलती न बन जायें । ईंसान कि छोटी गलती बाद मे जा के बहुत बडीं गलती का रुप धारण कर जाती है ।

आपको क्या लगता है

जो आपके साथ है वही आपकी जिन्दगी है, जिन्दगी के रास्ते कि सफर आपको तय करना है । जो आपके रास्ते मे कई पत्थरें हो सकते है, कंटे हो सकते है और नजाने कई कठीनाईयां हैं, जो खुले आँखो से दिखाई नहीं दे, सकते । पर हमे कफी परेशानी तथा बहुत बडा गड्ढा मे धकेल देती है । जिन्दगी आपका है जो कि आने वाले काल और भविष्य मे जिने वाले है, ईसीलिये फैसला भी आप ही के हाथों मे है, हमारे व्दारा बताये बातों को अपने जिंन्दगी से जोडें या न जोडें । ये आपके फैसले के ऊपर निर्भार करता है कि आप क्या करना चाहते है किस करह से जिना चहते है ।

Leave a Reply

Close Menu