ishq mein marjawan:- यह कहानी उस समय कि है जो कि राजा धननजाय अपने बेटी राजकुमारी कि शादी के लिये, वर ढूंड रहे थे । राजकुमारी एंजो को राजमहाल तथा महाल मे काम कर रहे स्त्रीओं के आलावा किसी ने नहीं था । क्योंकि राजकुमारी के जन्म से पहले ऋषी त्रायोदस ने भविष्याणी किया था कि राजकुमारी कि विवाह राज्य के किसी युवा के साथ ही होगी और उसका पुत्र ही विजायनागर का राजा बनेगा । यह राजा धनानजय को मंजुरी नहीं था, कि राजकुमारी राजकुमार को छोड के किसी अम इंसान के साथ शादी करे और वह राज गद्दी पर बैठे । राजकुमारी के जन्म के बाद राज्य के पूरूषों को राजमहाल के आंदर प्रवेश करना बाँद करवा दिया ।

ishq mein marjawan
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एंजो कि उम्र विवाह कि हो गई तो उसके लिये वर देखा जा रहे है, कई राजकुमार, राजकुमारी एंजो को देखने के लिये, गये पर माना करती गई । विजयनागर मे ही, जमींदार का बेटा परख था, जो कि उसका चाल व्योहार दिनचार्य राजा महाराजाओं जैसा था । वह राजाओं कि तरह ही जि रहा था, राजाओ कि तरह ही वह रहता था । परख हर सोमवार को राज्य के पास वाले नदी किनारे स्थिती माता रानी कि प्रर्थना के लिये जाया करता था । एक दिन उसकी नाजर नदी पर नहाते सुंदर कन्या पर पाडीं, जो भारी मात्रा में परख के दिल को घायल कर दि । उस दिन परख को घर मे बहुत जरूरी काम था, इसीलिये उस कन्या से मुलाकत करने का समय न मिला, जल्दि से घर लौट गया ।

 आगले सोमवार को माता रानी के प्रर्थनानके लिये गया पर उस दिन वह सुन्दर कन्या नहीं दिखी, आस पास देखा पर वो कन्या नहीं मिली । उस दिन के बाद उस कन्या को देखने के बैचायन हो गया था, और कफी उदासी मे जिन्दगी जी रहा था, ishq mein marjawan, marjawan, गाना गता रहा । लेकिन जिंदा ही मार मार के जी रहा था । पडोस राज्य से उसका दोस्त कर्मा मिलने के लिये आया था, बहुत आच्छा चित्रकार भी था । परख के हलत को देख के ही कर्मा समझ गया था कि किसी कन्या ने उसके ऊपर जादू कर दिया है । उसके हलातो को देख कर्मा पूछता है कौन है वो कन्या ? परख ने कर्मा को सारी बाते बताया, परख के बताये अनुसार कर्मा उस कन्या कि चित्र तैयार किया ।

दोस्त के नाते कर्मा परख से वादा करता है  कि उस कन्या से परख कि विवाह करके रहेगा । विजायनागर के चपा चपा कोना कोना उस कन्या को ढूंडा पर कर्मा को वो कन्या नहीं मिला । कर्मा को शाक हो गया था कि वह राजमहाल के ही कोई कन्या होगी, वह राजा के भेस मे राजकुमारी को देखने के बहाने महाल में प्रवेश कर गया । राजमहाल पहुंचने के बाद कर्मा का शाक साही निकला वह राजकुमारी एजों निकली, जो कि परख के दिल को घायल कर दि थी ।

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उसी समय राजमहाल में बहुत महान राजा गया जो कि बहुत बहादूर और तकातवार था । उस राजा के बहादूरी देख कर्मा को लग रहा था कि उसे ही राजकुमारी कि शादी हो जायेगी । कर्मा को इस बात पर बार बार याद सता रहा था कि उसके दोस्त के वादे को पूरा नहीं कर पाया तो वह उसके याद मे ही मार जायेगा और उसके जिम्मेदार खुदको को मनेगा ।

राजमहाल से निकालने के बाद वह राजमहाल के गुप्त दरवाजा को ढूंडके, उस गुप्त दरवाजा से महाल में प्रवेश कर जाता है, उसके बाद राजकुमारी को महाल से उठा लेता है । राजकुमारी को सामने वाला माता रानी के मंदिर मे ले जाता है, जहाँ पहले से परख वहाँ पहुँचा रहता है । उस समय परख को बताता है कि विजयनागर कि राजकुमारी है, पऱख को बताने के बाद एंजो से पूछता है क्या तुम मुझसे शादी करोगी । राजकुमारी के मर्जी के से ही वे शादी कर लेते है ।  अपने वादा को पूरा करने के बाद कर्मा इकतला करते हुये कहता है, राजमहाल के सेना ढूंडते हुये आ ही रहे होंगे । यह काह  उन्हे बहुत दूर भेज देता है यह काह कि राजमहाल के सेनाओं के हाथों मे आने से उन्हे मार देंगे ।

उन्हे दूर भेजने के बाद कर्मा बहते नदीं में कुद के अपना जान दे देता है, उसे पता था कि राजा के हाथ मे आ जाने के बाद वे कफी दर्दनाक मौत देंगे । राजकुमारी को देखने गया राजा विरेन राज, कफी गुस्सा में था कि उसके होने वाली राजकुमारी को कोई उठा के ले गया है । परख के घर पर न होने पर राज्य के लोगो  को शाक हो गया था कि राजकुमारी को उठाने वाला परख ही होगा, यह सोच गाँव के लोग उसके घर पर घूस के देखे । तो उन्हे कर्मा के व्दारा बनायें, राजकुमारी कि चित्र मिलता है । उस चित्र को देखने बाद राजा परख को जोरो से तलश करने लगा ।

राजकुमार विजाय भी एंजो के आने कि इंतजार में था, वह भी उन दोनो को तलश कर रहा था । ढूंडते आठ साल बित चुका था । वे दोनो घने जंगल मे पशु पक्षीओं के साथ रह रहे थे, उस समय उनका 7 साल का बेटा आंगर भी था । ढूंडते हुये राजमहाल के सेना तथा विरेन राज को वे मिल गये । विरेन राज कि परख को निशाने करते हुये तीर छोडा पर, एंजो अपने ऊपर ले लेती है । लेकिन तीर की गती इतने तेज थी कि एंजो को पार करते हुये, परख के सिने को भी पार कर जाती है, जिस्से दोनो कि मौत हो जाती है यानी कि ishq mein marjawan, उनके साथ हो जाता है ।

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सब कुछ झाडी मे छिपे, आंगर देख रहा था, उन दोनो को मारके सेनायें तथा विरेन राज महाल लौट जाते हैं । विजायनागर का राजा धनानजय कफी बुढा हो गया था और राजकुमारी के आलाव कोई उसके वंश नही थे । ईसीलिये राजा धनानजाय अपनी राज्य विजय राय को सौपंते हुये राजा का पद देता  है ।

उधार आंगर को अपने माता पिता का मौत का बदला लेने के लिये, कसम खाता है कि विजयनागर को अपने पैरों तले दबायेगा और विजय राय के किसी एक बेटी से शादी करेगा । आंगर बडा होता गया, उसका बादले कि आग भी तेजी से बाढ रहा था । उसके बडे हो जाने के बाद वही किया जो कि 7 साल के उम्र मे कसम खाया था,  उसने राजा विजयराय के बेटी के शादी कर लेता है । गुप्त दरवाजा से महाल मे प्रवेश कर विजय राय को मार देता है, और विजय राय के बेटे राजकुमारों भी यह सोच कि बाद में वे उनका काँटा न बनें । इसीलियें काँटो को निकालने से पहले ही साफ करता गया और विजयनागर का राजा का पद धारण कर लेता है ।

क्या आपको पता चला कि इस कहानी का असली विलेन कौन है ? क्यों है ?

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