life cycle of a butterfly:- इस लेख में तितली के जीवन चक्र को बिस्तार से बताया गया है, जिसमे तितली के चार चरण( Stage) होते है जो कि पूरी तरह से वयस्क होने तक आंडा, लार्वा, प्यूपा और वयस्क तब जा के तितली को अपना रूप मिलता है ।

Life cycle of a butterfly
life cycle of a butterfly

तितलीयाँ एक जीवन मे ही चार जीवन चक्र से गुजारती है, तब जा के तितली को अपना आकार मिलता है । तितली के प्रत्येक जीवन चक्र अलग अलग होते है, तीतली के प्रत्येक चरण के लिए अलग लक्ष्य होता है । जिसे तितली के आकार मिलने तक को कायापलट (परिवर्तन या आकार में परिवर्तन होना ) कहा जाता है । तितली के जीवन चक्र की प्रक्रिया मे एक महिना से एक साल तक का समय जा जाता है, लेकिन यह तितली के प्रकार  के ऊपर निर्भार करता है । 

देखा जाये तो किटों मे दो समान्य प्रकार की कायापलट होती है, ग्रासहोपर, ड्रैगनफलीज  और जो कोक्रोच मे अपूर्ण रूप से मेटामोफोर्फिसिस होता है । जो कि बच्चा अमतौर पर अपने माता पिता के जैसा दिखाई देता है, लेकिन बिना पंखो के ।  तितली के साथ पतंग, भृंग, मक्खियाँ, मधुमक्खियां आदि का मे कायापलट होता है । जो कि वयस्क होने से पहले बहुत अलग दिखाई देते हैं, लेकिन वे अमतौर पर किटों के प्रकार के अनुसार भिन्न भिन्न भोजन खाते हैं ।

तीतलीओं के कायापलट के चार चरण होते हैं: अंडा, लार्वा, प्यूपा, वयस्क

पहला चरण: अंडा

Life cycle of a butterfly
तितली के अंडे

पहला चरण एक मादा तितली बहुत छोटे, गोल, अंडाकार का या बेलनाकार अंडे देती है, तितली के अंडे देने से पहले, अपने पैरों से पाता करती है कि पत्ता अंडों के लायक है या नहीं । जब तितली अंडे देती है तो उसका अंडा गोलाकार दिखाई देता है पर सभी अंडे एक जैसा नहीं होती है, कुछ अंडाकार और पसली भी होती लेकिन अन्य रुपों मे भी हो सकता है । अधीकतार अंडे गोलाकार ही होती है, साथ ही तीतली के प्रकार पर भी अंडे का आकार निर्भार करती है साथ मे यह भी निर्भार करता है, कि जिसमे अडां को रखी वह किस तरह कि पत्ते पर दे रही है ।

जब तितली अंडे देती है तो वह वास्तव में बंद आंडे को देती है । जो अंडे देने के पाँच दिन बाद अंडा से एक छोटा सा किडा के सम्मान जीव निकालता है । उसके बाद तितली का पहला जीवन से दूसरे जीवन कि ओर जाता है । तितली के अंडे वसंत गर्मी, या गिरने से रखे जा सकते है, यह भी तितली के प्रजातियों पर निर्भार करता है । अगर आप अपने जिंदगी मे तितली के अंडे देखने कि चाह है तो आप तितली के अंडो को पौधो पर तलाश सकते हैं । क्योंकि तितलीयाँ अंडो को पत्तीओं मे ही  रखती है, लेकिन अडें कफी छोटे होते है, जिसके कारण अंडो की तलाश करने में कुछ समय लगता है साथ में वैसे ही किसी भी जगाह पर नहीं मिलता है । जिसके कारण ज्यादा से ज्यादा जाँच करने कि अवश्यक्ता होती है ।

 दूसरा चरण: लार्वा (कैटरपिलर)

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लार्वा (कैटरपिलर)

तितली जीवन के चार चरण होते हैं, जो कि एक को तो पार कर चुका है जो कि दूसरा चरण तक पहुंच चुका है । लार्वा को कैटरपिलर भी कहा जाता है, जो कि दिखने मे लंबा प्राणी होता, किडे के सम्मान दिखाई देता है । अधीकांश लार्वा शांत पैटर्न के होतें हैं, जो कि पैट्रन मे धारियाँ होती है । लार्वा लम्बे समय तक नहीं राह सकता है, लेकिन लार्वा को भूक लगने पर वह पत्तियाँ और फूलों को खाने लगता है ।

यहाँ मादा के पत्ते का चुनाव का फयदा लार्वा उठाता है, वह अपने भूक शांत करने के लिए माता के अंडे दिये पात्ते को ही खाता है ।  क्योंकि मादा तितली को आच्छे पता होता है को छोटा लार्वा अन्य पत्ते पर जा नहीं सकता है, इसीलिए मादा तितली अंडे देने से पहले अच्छे पत्ते का चुनाव करती है । लार्वा जिस पत्ते मे रहता है उसी पते को खाने लगता है, लेकिन प्रत्येक प्रकार लार्वा अन्नेक पत्ते का चुनाव करते है, यानी एक तितली के प्रजातीयाँ अन्नेको पत्ते पर अंडा देती है । जो कि लार्वा खा सके ।

जिस पत्ते मे वह लार्वा पैदा हुआ होता उस पत्ते को खा के समाप्त करने तक, लार्वा कफी बडा हो जाता है । पैदासी पत्ता समाप्त होने तक कफी बडा हो चुका होता है, जो कि दूसरे पाते के मे जाता है । उस समय लार्वा को भूक भी बहुत लगती है, जिसके कारण वह ज्यादा खाता है ताकि वह जल्दी से बडा हो सके । सबसे खस इनमे यह होता है कि जब लार्वा खाना शुरू करते है, तो वे तुरंत से बढने लगते हैं ।

लेकिन उनका त्वाचा मे खिंचाव नहीं होती है जिसके कारण, वे कई बार उभरी त्वाचा के साथ बढते हैं । लेकिन लार्वा जैसे- जैसे बढता है, वह त्वाचा को बिभाजित करता है और लगभग 4 से 5 बार बहाता है । एक कैटरपिलर अपनी बहती हुई त्वचा को बहाकर पिघला देता है। साथ मे जितने भी खाये जाने वाला भोजन संग्रहीत कर उस भोजान को वयस्क जीवन मे उपयोग मे लाता है । यानी कि देखा जाये तो लार्वा  के चरण मे उनका आकार जन्म से लेकार तक मे से 100 गुना तक बढ जाता है ।  जो कि 2 इंच की लंबाई तक बढता है ।

तिसरा चरण: प्यूपा (क्रिसलिस)

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प्यूपा (क्रिसलिस)

इस चरण में लार्वा बडा होता है, वह एक प्यूपा मे बादल जाता है । इसीलिए प्यूपा चरण तितली जीवन का सबसे आच्छा चरण मे से एक आता है । जब लार्वा बाढ जाता है, वह अपनी लम्बाई, वाजन कफी बढा लेता है, जिसके बाद वह प्यूपा के रुप मे आ जाता है, जो कि क्रिसलिस भी कहा जाता है । प्यूपा दिखने मे भूरे या हरे रंग का होता है, प्यूपा उसी रंग मे होता है जैसे उसके आस पास के पत्ते, पेड या शाखायें होंगे । इसीलिए प्यूपा दूसरे जनवारों के प्रति कफी ज्यादा सुराक्षित रहता है, जिसे देख नहीं पाते है । कई प्यूपा रेशम कोकून के अंदर रहते है ।

 प्यूपा विश्राम अवस्था होता है, जिसे बाहर से देखने से जैसे लगता है कि लार्वा आराम कर रहा है । लेकिन दिखने में भले ही शांत होती है । लेकिन अंदर ही अंदर बडे बादलव होते हैं क्योंकि इस समय लार्वा का बादलने कि अवस्था भी होती है, जिसके कारण लार्वा प्यूपा के अंदर तेजी से बादलव लातें है । जो कि प्यूपा के अंदर, लार्वा पुराने शरीर के हिस्सों मे कफी उल्लेखनीय परीवर्तन होता है, जिसे मेटामोफोर्फिसिस कहा जाता है । जिसमे लार्वा के उतक, अंग जैसे पैर पँख आदि निकाल आते है । जो की पहले उनमे नहीं होता है ।

प्यूपा चरण कुछ हफ्तों से लेकार महीने तक होता है, उस्से अधीक लंबे समय तक भी रह सकती है, लेकिन कुछ प्रजातीओं मे पुतली कि चरण दो साल तक रहता है । उसके पैर, पंख, आंखे निकालने के बाद वह वयस्क तितली के रूप मे आ जाता है । उसे तितली के आकार मिलने के बाद, प्यूपा का जीवन चक्र समाप्त हो जाती है ।

 

  चौथा चरण: वयस्क तितली

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butterfly

जब तितली पहली बार प्यूपा से निकालती है, दोनों पंख शरीर के खिलाफ मुडे हुये होते है । ऐसा इसलिए ताकि तितली अपने सभी हिस्सों को आच्छे से निकाल सके । जब तितली पहली बार निकालती है तो उसका पंख नरम होती है और मुलायाम । क्रिसलिस से निकालता हो बहुत रगिंन होता है, निकाल ने के बाद फडफडाने के लिए पंखो मे रक्त संचार करती है  ताकि तितली उड साके ।

आमतौर पर पंखो मे रक्त संचार, तीन से चार घंटे तक की अवधी के भीतर हो जाता है, जिसके बाद उडान करने लगती है । लेकिन शुरूआती उडने में तितली जल्द ही थक जाती है, तो वह आराम करती है । वह उडने कि अभ्यास बहुत करनी पडती है, लेकिन उन्हे उडने मे ज्यादा देर तक नहीं लगता है, वे तेजी से सिखते है । उन्हे ज्यादा अभ्यास करने के भी अवश्यक्ता नहीं होता है ।

उडान के अभ्यास के बाद तितलीयाँ अपने लिए भोजन कि तलाश करती है, देखा जाये तो लार्वा का काम होता है ज्यादा से ज्यादा खाना और जल्दी से बडा होना । वयस्क तितली का काम होता है, अंडे देना इसीलिए प्रजनन के लिए साथी को तलाशती है । उसके साथी के तलाश के बाद वह साही पौधा में अंडे देती है और जीवनचकक्र फिर से शूरू हो जायेगी । अधीकांश वयस्क तितलीयाँ एक या दो सप्ताह तक ही जीवित रहती है लेकिन शर्दीओं के ममले महीनो तक राह सकती है ।

 सारांश

तितलियाँ एक जीवन मे ही चार जीवन चरण को जिती है, पहला चरण अंडे देना, यह वह जगाह होता है जो कि मादा तितली, पत्ते मे अंडे छोड देती है । अंडे से लार्वा मे बादल जाता है, यह वह जगाह होता है जहाँ लार्वा हर समय खाता रहता है अपने आपको बढाता है । जिसके कारण लार्वा तेजी से बढता है, उसके बाद तिसरा चरण मे आता है । चौथा चरण मे लार्वा एक प्यूपा मे बादल जाता है, जो कि लार्वा उसके अंदर रहता है । प्यूपा के अंदर वह बदलना शुरू कर देता है । तीसरा चरण मे वह जल्द ही तितली मे बादल जाता है,  जिसके कारण वह चौथा चरण मे आ जाता है । चौथा चरण तितली प्यूपा से निकालती है, उसके बाद उडान सिखती है । साथी के तलश के बाद मादा तितली अंडे देती है उसके बाद फिर से जीवन चक्र शुरू होती है ।

इंसान के जीवन मे तितलियाँ

तितली दिवस हर वर्ष 14 मार्च को अंतराष्ट्रिय मनाया जाता है । वसंत और गर्मी के कोने मे एक दिवस मनाने का साही है । यह दिवस इसलिए क्योंकि उस दिन तितलिओं के बारे मे कुछ नया सिखने को मिलता है और तितलीओं का सुन्दारता सहाराने का एक समय मिलता है । खस कर दिवस मनाने का यह वाजह है कि अधीक से अधीक तितलीओं को जिवीत रखा जा सके, उनको जीवित रखने लिए उन्हे हमारी मदद की जरूरात है । क्योंकि उनके जीवित रहने के लिए फूलों और अन्य प्राकृतिक स्रोतों पर निर्भार हैं, इसीलिए हमें अधीक से अधीक पेड लगाकर उनकी मदद करने की अवश्यक्ता है ।

Life cycle of a butterfly
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शायद हमारी उम्मिद तितलीयां लेकार रखे है जो कि शायद चाहते है कि हम उनके मदद करें । क्योंकि हम अपने सामाजिक सोच कि वाजह से हम एक सामाजिक प्राणी कहलाते हैं । इसीलिए हम इंसानी सामाज का केवल नहीं बल्कि पूरे जीव जगात का देख भाल करें और उनको बचाये रखने में उनका मदद करें । लेकिन हम अपने स्वार्थ के लिए, बहुत से जीवों का खत्मा कर चुके हैं, जो कि कुछ साल बाद इस दुनिया से लुप्त हो जायेंगे ।

मदद की भवना हर किसी के मन मे होती है पर समय और परीवार के खर्चा के बोझ के कारण इंसान, इसान कि मदद नहीं कर पाता, जीव तो बहुत दूर कि बात है । फिर भी हम जीवो का मदद कर सकते हैं, आपके जन्म दिन या आपके सबसे खुशी के दिन मे एक पेड पहचान के रूप मे लगायें । आपके लिए एक यायदगार बनाने का आच्छा जारीया है जो कि आप अपनी यादों को एक पेड मे रख सकते है, साथ ही आपके एक पेड लगाने के बाद अन्य जीवों को भी लाभ होगा । कितना अच्छा लगेगा जब हमारे आस पास तितलीयाँ उडेंगे, हरा भरा और स्वाच्छा वायु हमें मिलेगा ।

तितलियों के बारे में मजेदार तथ्य

1 तितलियाँ अपने पैरों से स्वाद को पहचान लेती हैं।

2 तितलियों के मुंह नहीं होते ।

3 तितलियों को सूरज की उड़ान भरने की जरूरत होती है ।

4 तितलियाँ दिन के समय उड़ती हैं।

5 तितलियाँ कुछ रंग देख सकती हैं । वे लाल, पीले और हरे रंग को देख सकते हैं ।

6 यदि वे बहुत ठंडे हैं तो तितलियाँ उड़ नहीं सकतीं । उन्हें उड़ान भरने के लिए गर्म स्थान चाहिए होता है ।

7 तितलियों के शरीर के बाहर उनके कंकाल हैं । यह उनकी रक्षा करता है, इससे उनके शरीर के अंदर पानी रहता है । यह उनके लिए अच्छा है, क्योंकि वे बाहर नहीं सूखते हैं।

8 एक तितली के पंख पारदर्शी होते हैं । एक तितली के पंखों में छोटे पैमाने होते हैं । ये उनके पंखों को रंग देते हैं। यही कारण है कि वे हमारे लिए पारदर्शी नहीं दिखते हैं।

9 सबसे बडी तितली 12 तक इंच पाई गई और सबसे छोटी तितली आधे इंच की पाई गई ।

10  धारती पर “89’98” नाम के तितली भी है, इसका यह नाम कि वाजह इसके पखों की एक तरफ 89 और दूसरी तरफ 98 लिखा हुआ है ।

11 तितलियाँ सून नहीं सकती है, वाईब्रेशन से महसूस करती है ।

12 धरती पर 24,000 से भी अधीक प्रकार की तितलीयाँ मौजूद है ।

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