Life cycle of frog :- संसार बहुत बडी हैं जिसे सिर्फ आधा तो कल्पना करके ही देखा गया । जिसे आज तक मे कई सारे जीव जन्तुओं का खोज किया गया पर अधीक से आधा जीवों का खोज आभी तक पता नहीं चाल पाया है । जितने भी पाये गये  कुछ पानी मे रहते हैं और कुछ स्थाल मे लेकिन मेंढक एक ऐसा जीव है जो कि जल और स्थाल दोनो ही जगाहों पर रहता है । इस लेख के व्दारा जनेंगे मेंढक का जीवन चक्र के बारें मे जो कि अंडे, टेडपोल, शिशु मेंढक और वयस्क तक  पहुंचता है । जीवन के प्रत्येक नई पीढी को, एक जीवन चक्र में दोहराता है ।

हमारे इस पृथ्वी पर रहने वाले जीवों का संख्या, बहुत अधीक हैं और हर जीव का जीवन का चक्र नहीं बल्कि, कई जीवों से भिन्न होता हैं । देखा जाये तो स्थल पर रहने वाले जीवों का जीवन चक्र पानी मे रहने वाले जीवों के मुकाबले कई  गुना अलग होता है । ज्यादातर स्तनधारी जीवों मे बच्चे होने के बाद, आच्छे के देखभाल किया जाता है जब तक कि बच्चा वयस्क रुप धारण न करले । और  वे बच्चे छोटे मे भी अपने माता पिता के जैसे ही दिखाई देते हैं, और वयस्क होने के बाद भी वे अपने माता पिता के जैसे ही दिखाई देते हैं ।

देखा जाये तो अन्य जीव जैसे, भृंग, मेंढक और तितलियाँ सहित अन्य, जीव मेटामोर्फोसिस नाम के प्रक्रिया से गुजरते है । मेटामोर्फोसिस जिसका मतलब  यह होता है कि, जीव के जन्म के बाद वह जीव अपने माता पिता के मुकाबले बहुत अलग दिखाई देता है । जो कि बच्चे के कई बिकसित होने के बाद वह अपने माता पिता के जैसा दिखाई देता है ।

आप  मेंढक के जीवन चक्र को चित्र के द्वारा समझ सकते हैं, जो कि जन्म से लेकार कई  बिकासीत होने के बाद उसे मेंढक का रुप मिलता । मेंढक के जैसे ही अन्य मेटाफोर्सिसों के जीवन चक्र मिलता जुलता ही पाया जाता है ।

Life cycle of frog | जानें एक मेंढक के जीवन चक्र के बारे में
Life cycle of frog

मेंढक के जिवन चक्र के साथ मेंढक का विकासी चरण

एक मेंढक का जीवन चक्र

मेंढक का जीवन पानी के साथ जामीन पर भी है, जो कि उसका जीवन एक अंडे से शूरूआत होती है । और मेंढक वयस्क होने तक जीवन के कई चरण पानी मे ही होता है ।

पहला चरण अंडा

एक मादा मेंढक, एक समय मे 2500 – 3000 तक के अंडे दे सकती है । जो कि द्रव्य पदार्थ के रूप मे जल में तैरती रहती है । जो कि तैरते-तैरते टैडपोल के रूप मे मिल जातें है ।

दूसरा चरण टैडपोल

जब टैडपोल मिल जाते है तो, दिन के साथ वह मछली की तरह दिखाई देने लगता है, जो कि उस समय पैर नहीं निकला हुआ रहता है । और उस समय उसमे गिलफड भी निकाल आते हैं जिसके बाद वह पानी के अंदर सांस लेने लगता है । टैडपोल पानी में मौजूद तैरते पदार्थों जैसे  लसीले पौधे, शैवालों को अगला चरण तक नहीं पहुंच जाता वह हफ्तों तक खाया करता है ।

कई हफ्तें बितने के बाद टैडपोल मे दो हिंद पैर आने लगते हैं, जो कि मेंढक उस पैरों के सहारे तैरने के साथ छलंग लगा सकता है (उछाल कुद कर सकता है) । साथ में लम्बी पूँछ निकली होती है, जो कि वयस्क मेंढक मे नहीं होते ।

तीसरी चरण यंग मेंढक

टैडपोल के पिछे के तरफ दो पैर बढने के बाद, उसके सामने के पैरों को बढाता है ।  जैसे आगे का पैर बढता जाता है वैसे ही टैडपोल का पूँछ छोटा होता जाता है । टैडपोल अपने पूंछ मे मौजूद संग्रहित पोषका तत्वों को भोजन के रुप में इस्तेमाल करता है । जब तक उसकी पूँछ छोटा नहीं हो जाता वह अपने पूँछ के आलावा और कुछ सेवन नहीं करता है । जब उसका मूँ अपनी पूँछ के आखरी छोर तक नहीं पहुंच पाता तो वह पूँछ के स्टब हिस्सा को बचा लेता है । टैडपोल युवा में बदलने तक उसका पूँछ भी गायब हो जाता है । उसके युवा होने के बाद ही पहला कदम वह जामीन पर रखता है, वह सुखा जामीन पर निकालता है, लेकिन वह जामीन पर ठिक से नहीं चाल पाता है क्योंकि उस समय मेंढक जामीन के लिए बहुत छोटा रहता है ।

चौथा चरण वयस्क मेंढक

मेंढक के वयस्क हो जाने के बाद, उसका पूंछ पूरी तरह से गायब हो जाता है और वह जिस समय टैडपोल था उस समय पानी के अंदर मौजूद पौछों को खाया करता था । लेकिन उसके वयस्क होने के बाद, वह पौधों को खाने कि वाजय किडे मौकोंडो को खाने लगता है । यहीं तक ही उसकी चक्र खतम नहीं होती है, वयस्क मेंढक लगभग 2-4 वर्ष तक बढता है । उसके बाद वह वयस्क मेंढक अपना अंडा देती है और फिर से मेंढक का जीवन चक्र शुरू होता है ।

गर्मी और शित के दिनों मे मेंढक कहाँ रहते हैं

मेंढके ठंडक से बचने के लिए, वे पानी के निचले सताह मिट्टी के लगभग 2 फुट की गहराई खोदकार वे बिना कुछ खाये, उसमे साजे रहते हैं । इसी तरह गर्मी मे भी जामीन के अंदर ही रहते हैं, एक बर्षत के बाद वे निकालते हैं ।

Life cycle of frog | जानें एक मेंढक के जीवन चक्र के बारे में
Life cycle of frog

मेढंकों कि इंसान के जीवन भूमिका

 मेंढक अपने जीवन काल में अपने खाना के लिए जीवों का शिकार करते हैं, जो हमारे पर्यावरण को बचायें रखने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं । इसीलिए विश्व भार में विश्व के कई लोगों व्दारा 2009 से विश्व भार में मेंढक दिवस मानाया जाता है । हमारे पर्यवारण के साथ लोगों के जगरूकता करने के लिए मानाया जाता है, क्योंकि मेंढक उभयचर भूमि और पानी में दोनो जगाहों पर रहता है । कुछ सालों के पश्चात पता चला कि मेंढको कि संख्या तेजी से कम हो रही है जो कि खतरे का संकेत दिखाई दे रही हैं जिसके कारण मेंढक प्रजाती को बचायें रखना जरूरी है, यही कारण है कि विश्व भर में मेंढक दिवस मानाया जाता है ।

ताकि लोग जागरूक हो लेकिन वनो कि लगातार कटाई के कारणों से मेंढकों को आबादी बहुत कम होती जा रही है । विश्व मेंढक दिवस कई जोवों को बचाने में मदद करता है और जो कि जीवों के लुप्त होने का खतरा को कम कर सकता है ।  जैसे ही हम क्रिसमास, जैसे बडे त्योहार साथ मिलके मनाते हैं, वैसे ही हमें मेंढक दिवस को भी सभी कोई मिलके मनाना चाहीये । इसे हमारे जीवन के सभी क्षेत्रों मे उत्सव के साथ-साथ कई पिढीओं को आगे ले जा सकते है, हमें इसमे अमल करने कि अवश्कता है ।

Leave a Reply

Close Menu