Love story films:-अगर देखा जाये तो वर्तमान और उस जमाने कि फिल्मो मे बहुत ज्यादा अंतर है । लेकिन उस समय या फिर वर्तमान के फिल्म मे अगर देखा जाता है तो कहानी को ही महत्व दिया जाता है । जिसका कहानी अच्छा होता है तो उसका दोबारा से फिल्म बनाया  जाता है । हांलाकि वर्तमान और उस समय कि फिल्मों को तुलना करना बदनामी है । लेकिन देखा जाये तो कहानी बहुत आच्छी है, जो कि फिल्म के कहानी से कफी हद तक जूडे रहते है । माना थोडा धीमी गती से चालती है पर जब तेजी से चलने लगती है तो फिल्म के साथ जूडने के लिए मजबूर हो जाते है । निचे दिये कुछ फिल्मो के नाम है जो मुझे कफी ज्यादा पसंद  है ।

 

Diljale 

अगर आप सोचते हैं कि प्यार ही सबकुछ हैं तो आप गलत हैं, प्यार के आलावा भी ओर कुछ जिंदगी मे मयने मे रखते है । प्यार, परीवार, कोलेज के जिंदगी जो कि एक ही पल मे सब कुछ तबाह कर देती है, एक कठोर जिंदगी मे धकेल देता है । जो कि मजबूर कर देती है तबाही करने में ।

Storyline

कैप्टेन रणवीर को शाका के साथ उसके साथीओं को पकाडने का काम शौंपा जाता है । कश्मिर के क्षेत्र में जाने के बाद रणवीर को एक लडकी दिखाई देता है, लेकिन उस लडकी नाम नहीं पता कर पता । जिसके कारण उस लडकी नाम से एक गाना गता है, “सोच रहा हूँ मैं उस लडकी का नाम”  जैसे ही गाना सपाप्त करता है वैसा ही रणवीर के सामने वह लडकी प्रकाट हो जाती है । वह कश्मिर क्षेत्र के राजा शाहब की बेटी राधीका होती है ।

राजा शाहब कैप्टेन रणविर और राधीका के शादी करने का व्यावस्था करते है, लेकिन उन दोनो के सगाई के रात को रणवीर को पता चलता है कि शाका और उसके दोस्त कुछ कि. मी. दूर गाँव पर तबाही करने मे लागे हुये है । कैप्टेन अपना सगाई को छोड के शाका को पकाडने के लिए निकाल जाता है । उनके निकालने के बाद शाका सगाई स्थान पहुंचता है और सगाई के मंडाप को तबाह करके चला जाता है । जाने से पहले शाका यह काह जाता है, “आग जो दिल मे लागी है, उसे पूरी दुनिया मे लगा दूंगा मैं, जो तेरी डोली उठी तो जमाने को जला दूंगा मैं” ।

 इसे रणविर को पता चलता है कि राधीका के शादी को रोकने के लिए शाका किसी भी हाल मे पिछे नहीं हटेगा और उस दिन से रणवीर कसम खाता है कि वह शाका को पकाडेगा तभी वह शादी करेगा । उस बीच मे कैप्टन रणवीर शाका के चार साथीओं को पकाड लेता है, उनके रिहा करने के लिए शाका वैष्णोदेवी भक्तों के बस को अपहरण कर लेता है । उसमे राधीका और उसके बुआ शामिल होते है । क्या कैप्टेन रणवीर राधीका को अतंकवादीओं से छुडा पायेगा ? क्या कैप्टेन रणवीर का शादी राधीका से होगा ? यह राधीका शाका के ही हो जायेगी ? अगर आप नहीं देंखे है तो इन्ही सवालों का जवाब फिल्म देखने के बाद पता चाल जायेगा ।

Rahna hai tere  dil me

कफी हद तक भी जब मैं इस फिल्म के एक रिंगटोन को सूनता हूँ तो दिमाग मे इस फिल्म की पूरी कहानी छप जाती है । इस फिल्म में जब भी “कैसे मैं कहूँ, रहना हैं तेरे दिल में रिंगटोन बजता है” तो फिल्म को ओर ज्यादा रोमंटिक बना देता है । थोडा शुरूआती दौर मे समझ मे नहीं आता है कि हो क्या रहा है लेकिन जब मैडी रीना को देखता है उसके बाद हर एक Dialogue आच्छा लगता है ।

Storyline

रजीव श्यामराव ( सैम ) को कोलेज में, कोलेज कि आधी लडकीयाँ दोस्ती होती हैं । दूसरी तरफ मधाव शास्त्री ( मैडी )  कोलेज मे किसी भी लडकी इज्जात नहीं करता है, वह किसी को देखता तक नहीं । अक्सर मैडी और सैम के बीच मे लढाई होते रहती है । एक दिन वैसे ही कुछ ज्यादा ही लढाई हो जाती है लेकिन उस दिन उन दोनों का लढाई अधूरी हो जाती है । कोलेज से निकालने से पहले सैम मैडी से काहे रहते है कि जींदगी मे दोबारा मिलेगा तो अधूरी लढाई को पूरा करेगा । सैम कोलेज के बाद अमेरिका चला जाता है ।

कुछ साल बाद पहली नाजर मे मैडी को किसी लडकी से प्यार हो जाता, लेकिन बदनाशिब कि वह उस लडकी का आता पता कुछ नहीं कर पता है । वैसे ही मैडी को एक शादी मे वह लडकी दोबारा से दिखाई देती है उस दिन मैडी उस लडकी का नाम पता कर लेता है, रीना मल्होत्र दिल्ली वाली । लेकिन वास्तव मे रीना मुम्बाई मे ही रहती है, पागल मैडी उसे बात करने के लिए तडपता है । रीना के दोस्त से झूट काह के रीना का नम्बर ले लेता है । मैडी को पता चलता है कि रीना कि शादी पहले से अमेरिकी रजीव से शादी होने वाली है ।

लेकिन रीना रजीव को नहीं देखी होती है, वह बचपन मे केवाल देखी होती । इसी का फयदा उठाते हुये रजीव के नाम से रीना से मिलता है और पाँच दिन के अंदर रिना को अपने प्यार मे पागल कर देता है । लेकिन उसके अगले दिन ही राजीव अमेरिका से मुम्बाई पहुंच जाता है । रजीव के आने के बाद रीना को पता चलता है कि उसके साथ धोखा हुआ है । क्या मैडी रीना को अपना पायेगा ? क्या रजीव से ही रीना शादी करेगी ? क्या मैडी रीना के वगैर राह पायेगा ? क्या सैम अपनी अधूरी लढाई को पूरा करने लौटेगा ? क्या मैडी रीना और रजीव के बीच से हट जायेगा ? सारे सवालों का जवाब फिल्म को देखने के बाद मिल जायेगा ।

 Pyaar ishq aur mohabbat

2001 मे आई यह फिल्म कफी लोगों को रोमिओ बनने के लिए मजबूर दिया था । फिल्म मे देखाए गौरव सक्सेना ने कफी लोगो का दिल जित लिया था । उसकी प्यारी बातें और लडकीओं को मनाने का तारीका कई तो आसली जिंदगी मे भी प्यार के बिजनेस किये पर बिजनेस फैल रहा ।

Storyline

युवा ईशा नायर से बहुत बडा बिजनेसमैन यश सभरवाल को प्यार हो जाता है । यश ईशा से अपने दिल की बात बताता है लेकिन ईशा यश को शादी के लिए माना कर देती है । जिसके कारण यश के दिल मे ईशा को पाने कि चाह और दिल मे और जग जाता है । एक शादी मे यश कि मुलाकात गौरव सक्सेना से होता है जो कि दो प्यार करने वाले को मिलाता है । अगले ही दिन गौराव को यश अपना ओफिस बुला लेता है और ईशा को यश के लिए पटाने को कहता है । गौरव दस करोड के झाँसे मे आ जाता है, और ईशा को पटाने के लिए चला जाता है । उस समय ईशा स्कोटलैंड पर रहती है, जो ताज भरदवाज के साथ रहती है । ताज भी ईशा को चहने लगता है, इसी बीच गौरव स्टोटलैड पहुंचता है ।

ईशा को पटाते पटाते गौरव को भी ईशा नायर से प्यार हो जाता है ।  इस बात गौरव को कफी समय बाद पता चलता है । ईशा के पास तिन लडके सामने होते है, जो अपने प्यार को पाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते है । अगर अपने नहीं देखा है तो यह फिल्म जरूर देखें, की ईंशा को कौन अपना बना पता है? 

Kya kehna

यह एक परीवारिक कहानी है जो कि गुलशन बख्शी के परीवार को दर्शाता है । कहनी आच्छा जो कि एक गलत कदम उठाने के बाद उसके परीवार और लडकी के बीच मे जो दिन बित्त है वही आपको देखने को मिलेगा । इस फिल्म के देखने के बाद आपको पता चाल जायेगा की परीवार के सदस्य कितनी किमती होते है, परीवार के एक एक सदस्यों के लिए ।

Storyline

गुलशन बख्शी के घर मे अपने बेटी प्रिया की इंतजार होती है उस खुशी मे प्रिया के पिता गुलशन, केक घर लिये होते है । लेकिन तब गुलशान के पत्नी और उनके तीन बच्चे बताते है कि प्रिया आज नहीं पाँच तारीख को आयेगी । प्रिया से अपने परीवार वाले बहुत प्यार करते है साथ ही प्रिया का सबसे आच्छा दोस्त अजय भी उसे बहुत चहता है दोस्ती कि नाजरीया से नहीं बल्कि प्यार कि नाजरीया से । स्टेशन मे प्रिया कि इंजतजार होती है लेकिन पता चलता है कि ट्रेन आठ घंटे लेट है ।

फिर भी प्रिया लिफ्ट मांग मांग के स्टेशन पहुचंती है जहाँ पर उसके पिता और अजय इंतजार कर रहे होते हैं । प्रिया कोलेज मे अपने पहली वर्ष मे प्रवेश करती है । जो कि उसकी मुलाकात राहुल से होता है और प्रिया के परीवार वालों को पता होता है कि राहुल एक गिरा हुआ इंसान है जो कि प्यार को खेल समझता है । प्रिया के भाई विक्की ने रहुल को प्रिया से दूर रहने को कहता है लेकिन राहुल को प्रिया के खूवशूरती अकर्षित कर देता है ।

दोनों मे प्यार हो जाता है, जब प्रिया के परीवार वालों को मालुम होता है कि प्रिया और राहुल के बीच मे हो रहा है तो प्रिया के परीवार वाले प्रिया को राहुल से मिलने के लिए माना कर देते हैं । लेकिन प्रिया के प्यार के जिद के सामने परीवार वाले टिक नहीं पाते है और बात शादी तक पहुंच जाती है । लेकिन राहुल यह काह के शादी के लिए माना कर देता है कि उसके लिए प्यार एक खेल है वहीं प्रिया को छोड के चला जाता है । और शादी नहीं हो पाता है, लेकिन प्रिया राहुल को भूल नहीं पाती है । प्रिया के भाई विक्की के शादी मे नाचते हुये बेहोस हो जाती है तो पता चलता है कि प्रिया माँ बनने वाली है ।

प्रिया के पिता और उसके भाई शादी कि बात करने के लिए दोबारा राहुल के पास जाते है लेकिन राहुल फिर भी माना कर देता है । प्रिया को बच्चे गिरा देने को कहे लेकिन प्रिया बच्चे को रखने को चुनती है । उसके यह फैसले से उसके पिता प्रिया को घर से निकाल देता है, अकेले । निकालते ही कुछ दूर पर कुछ गुण्डे प्रिया का पिछा करते है । क्या प्रिया से राहुल शादी करेगा ? क्या प्रिया को सहारा देने वाला कोई अयेगा ? क्या प्रिया गुण्डो से बच पायेगी ? इन्ही सारे सवालों का जवाब आपको फिल्म देखने के बाद आपको मिल जायेगा ।

Om shanti om

अगर आप किसी से प्यार करते है और आपका प्यार एक जन्म मे अधूरी हो जाये तो दूसरी जन्म के खयाल में रहते है तो आपको बतायेगी कि पहले जन्म के यादें कैसे आती है । कहानी लाईन बहुत आच्छी जो एक बार मरने के बाद पुनर्जन्म को आपके सामने दिखाता है और बताता है कि पुनर्जन्म के बाद भी बदला लिया जा सकता है ।

Storyline

ओम प्रकाश 1970 की हिन्दी फिल्म के जूनियर कलाकार होते हैं । ओम शांति को अग्नी से बचाता है, जो की आग के चपेट मे आने से शांति बच जाती है । उस दिन के बाद शान्ति और ओम प्रकाश के बीच मे दोस्ती हो जाता है और ओम को शांति से प्यार हो जाता है । लेकिन कुछ दिन पश्चात ओम को पता चलता है कि शांति कि शादी फिल्म निर्माता मुकेश मेहरा से हुई है और उनके बच्चे होने कि उम्मिद है । मुकेश को अपना करीयार डूबते हुये दिखाई देता है, एक स्टूडिओ मे शांति को झाँसे से बुलाकार स्टूडिओ के साथ शांति को भी जला देता है ।  उस वक्त ओंम वही होता है, शांति को बचाने के प्रयास में शांति के साथ ओम भी मारा जाता है ।

30 साल बाद एक बोलीवुड अभिनेता, राजेश कपूर के इकलौते बेटे के रूप में पुनर्जन्म लेता है । साथ मे वह एक अभीनेता होता है, जैसे दिन बित्ता है वैसे उसकी पिछले जन्म कि यादें वापस आने लगती है । वह अपने पिछले जन्म के माँ से भी मिलता है उसके दोस्त से भी मिलता है । वे साथ मिलके ओम शांति ओम का फिल्म बनाते है । क्या ओम अपने शांति से मिल पायेगा ? क्या ओम शांति ओम फिल्म बना पयेगा ? क्या उस समय तक मुकेश मेहरा जिंदा होता है ? इन्ही सारे सवालों का जवाब के लिए आपको फिल्म देखना पडेगा ।

जरुरी नहीं कि मुझे जो फिल्मे पसंद है वह आपको भी पसंद हो ऐसा नहीं होता है, क्योंकि हम अपने आप मे कईओं से अलग है । मैंने फिल्मो को अपने पसंद के अनुसार सजाया है ये नहीं कहीये कि उस फिल्म को आगे होना चाहीए । नहीं ऐसा नहीं होता आपको जो फिल्मे पसंद है, शायद मुझे पसंद न हो या फिर यह भी हो सकता है कि मुझे जो पसंद वह शायद आपको पसंद नहीं हो । हर किसी का अलग अलग पसंद होता है ।

मुझे लगता है की अपने जिंदगी के बितने से पहले इन हिन्दी फिल्मो को जरूर से देखना चाहीये, सारी फिल्मे internet पर मौजूद है । आप घर बैठे सारे फिल्मों को देख सकते है, जो कि कहानी माजा आ जायेगा ।

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