Suhani si Ek ladki:- कहने को तो बहुत कुछ कहना है, पर उस दिन मैं देखने के आलावा कुछ नहीं कर पाया । उन्हे पहली बार 27 मई को देखा, उन्हे देखते लग रहा था कि मेरी तलाश अब समाप्त हो गया, क्योंकि जिसकी मैं तलाश कर रहा हूँ वह सामने है । वह मुझे मिल गई जो कि मैं इंतजार कर रहा था । उसकी स्माईल बहुत आच्छी थी बहुत मुस्करा रही थी, बहुत ज्यादा मेरा नजर उस्से हट ही नहीं रहा था । देखता ही रहा, वह कफी लोगों के बीच मे थी, लेकिन लोगों से मुझे कोई दिक्कात नहीं था, बल्कि उसके साथ अंटी थी  उनसे दिक्कात था । उनसे मुझे दिक्कात हो रहा था, शायद उसका माँ कोई जनपाहन वाली थी ।

Suhani si Ek ladki: I too had a love story
Suhani si Ek ladki

उसके अंटी के किनार होने का इंतजार करता रहा पर फेवोकोल कि तरह चिपके रही, मैं सोचता रहा है कि कौन वो औरात है ? मैं उसे बात करने के लिए डर नहीं रहा था, न ही कँप रहा था । मेरे मन मे बार बार यही खयाल आ रहा था, कि कहीं मैं बात करूँगा उनके साथ वाली अंटी को बहुत बुरा लगेगा । यह सोच उनका हटने का इंतजार करता रहा । कई देर हो चुका था, मैं देखता ही रहा गया और वह चाली गई । शायद इसी को कहते है suhani si Ek ladki जो कि मेरे दिल मे जगाह बना ली  । मुझे बहुत ज्यादा पछतावा हुआ कि मैने बात क्यों नहीं किया और मुझे लग रहा था कि वह दोबारा मुझे नहीं मिलेगी । मैं अपने दिल को थम अपने से कहा की कभी कभार ऐसे हाल का, समना करना पडता है, एक अधूरी सी मिलन पूरा होने कि संभवना के लिए ।

पता नहीं उस दिन के बाद मुझे क्या हो गया मैं तारों से बात करने लगा, तारे गिनता चाँद को मेरे दिल की हाल उसे बताने के लिए कहता । दिल बवला सा हो गया था, आंखे उसे देखने के लिए तडप रहा था । शायद चाँद ने मेरे दिल का हाल समझ लिया था वह मुझे दोबारा दिखाई दी । उस दिन मेरे सामने किसी प्रकार का कोई झंझट नहीं था, वह अकेले थी । वह खडी हुई थी, मैं उसके सामने गया, वह मुझे देख रही थी, कुछ अलग नाजर से जैसी कि वह याद करने कि कोशिस कर थी । मैं कुछ कहता ही कि वह झट से बोली तुम वो ही होना जो 27 तारिख को मुझे घूर रहे थे ।

अचानाक से मैं हडबडा गया था, लेकिन मैं जल्दि से जवाब देते हुये कहा तुम इतनी खूबशुरात हो की तुमसे नाजर हटाने कि कोशिसें बार बार नाकमयाब हो गया था । मैं कुछ नहीं सोचा दिल मे जो आया जल्दि से बोल दिया, वह हँसते हुये सिर झुका ली । बोली तुम्हे पता है, वो मेरी माँ थी, तुम्हे वैसा नहीं देखना चाहीये था । मैं बहुत शर्मेंदा था, जब वह वैसा बोली लेकिन मैं क्या करता ? अपना ही गलती था उस दिन मुझे अहसास हुआ कि किसी भी लडकी को ज्यादा नहीं देखना चाहिये । उसके बोलने के बाद मैं कुछ नहीं काह पाया, सिर्फ दोस्ती करके जल्दि से निकाल जाना चहता था । मैने दोस्ती का हाथ आगे बढाया और हम दोनों मे दोस्ती हो गई ।

Suhani si Ek ladki: I too had a love story
Suhani si Ek ladki

मेरे वहाँ से जाने से पहले वह मुझे उसकी बाहन की शादी में बुलाई, मैं छती चौडा करके शादी पहुंचा । पर कहीं भी दिखाई नहीं थी, नाम तो पूछना ही भूल गया था, इसीलिए किस को पूछता । मंडप मे दुल्हा, दुल्हान बैठे हुय़े थे तो भी वह दिखाई नहीं दी रही थी, मैं दुल्हा के सामने खडा हुआ था । जब दुल्हा सिंदूर लगा रहा था, तब मैं देख चौंक गया क्योंकि उस दिन उसी लडकी कि शादी हो रही थी । मेरा दिल एकदम अचानाक से टूट गया, फिर भी मैं क्या करता । उसे शादी मजबूरी मे करना पाडी क्योकिं उसकी बहन शादी से आंधें घंटे पहले ही अपने बोयफ्रैंड के साथ भग गई । मेरा suhani si Ek ladki ने अपने बहन के लिए अपना जीवन को त्याग दी । वास्तव मे यह कहानी पूरी तरह से कल्पनिक है, आस्ली जिंदगी से कोई वस्ता नहीं रखता है ।

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