yeh rishta kya kehlata hai:- मैं रोड किनारे खडा हुआ था,सभी कोई होटेल के दरवाजा के सामने कोमेडी कर रहे लोगो को देख खूब हँसने मे लगे हुए थे । लेकिन मुझे हंसी ही नहीं आ रहा था, शायद मैं हंसने के लिए कंजूशी कर रहा था । तभी मेरे पास दो लडकियाँ गये, पास जा के एक मुझसे सवाल पूछी- क्या हुआ ? मैं क्या जवाब दुँ, सोच रहा था । लेकिन जब तक मैं सोच के जवाब देता वे चाले गये, कुछ दूर जा के वह मुझे चिल्ला के बोली कि तुम सारे लडके एक ही जैसे होते हो क्या ? अगर दिल मे प्यार है तो बताते क्यों नहीं ।

मैं उसके बातों पर अमन कर दौड कर गया और मैं पेन निकाला, उसके बाद अपना फोन नम्बर उसके हाथ मे लिख रहा था । तभी उसके हाथों कि लाकिरे चमकने लगी, वह दूसरे हाथ से चमकते लाकिरों को छिपा दि । मैं कुछ पूछता कि मेरे सपने कि कहानी ही बादल गया । उसके पिता को पता चाल चुका था, कि हम दोनो के बिच मे प्यार चाल रहा है । लेकिन मुझे उसके पिता बचपन से जनता था, लेकिन मैं उसे नहीं जनता था । उसने मेरे बारें मे बताते हुये कहा कि- मैं दुनिया का तबाही का अतांक हूँ, जो कि तुम्हारे मिल जाने के बाद पूरी दुनिया तबाह हो जायेगी ।

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yeh rishta kya kehlata hai

उसके पिता ने मुझसे बात करने के लिए माना कर दिया और मुझे मरने के लिए उसके आदमिओं को भेजा पर बार बार बच निकला । मुझमे बार बार हमला से मैं अंजन था, लेकिन मुझे शाक भी था कि मुझपे हमला करने वाला उसके पिता ही होगा । जब मुझसे कई दिन तक मिलने नहीं आई तो मैं उसके घर गया, जैसे ही हम दोनो कि हाथ एक दूसरे के हाथों मे आया वैसे ही आकाश से पत्थरें गिरने लगी साथ मे तेजी हवा हमारे तरफ आ रही थी ।

हम दौडते दौड रहे तभी मुझमे सूपर पावर आ गया, उसके बाद मैं तेजी से दौडने लगा । मैं अपनी गर्लफ्रैंड को बचाते हुये तेजी से दौड रहा था, हमे तेजी हवा पहूंचाने ही वाला था कि मैं जग गया । ये दूसरी बार हुआ जो कि मुझे सपने मे किसी लडकी से प्यार हुआ और कहानी अधुरी रह गया ।

मैं उस सपने को अपने जिंदगी मे न जोडते हुये, आगे कि जिन्दगी मे निकाल गया । बार बार वही सपना का खयाल रहा था, अपने आपसे कई सवाल पूछ रहा था । कहीं मैं सचमे दुनिया को तबाही का कारण हूँ ?ऐसे ही कई सवाल मैं अपने आपसे पूछ रहा । शाम हो चुका था मैं उस सपने को भूला नहीं पाया था । अंधेरा हो चुका था, अकेला मैं छत मे बैठे आकाश कि ओर देखा हुआ था । कुछ देर हुआ था कि मैं छत से उतारता लेकिन अचानक मैने आकाश से उल्का पिंड गिरते देखा । वह उल्का समान्य उल्का खंड से बडा था, वह मेरे घर के कुछ दूर जा के गिरा । जामिन पे गिर के भी वह उल्का पिंड चमक रहा था ।

मैं छत से दौड के उतरा और उल्का पिंड गिरा स्थान पहुंचा । वहाँ पहुंचने के बाद जब मैने देखा तो मैं अपने आपसे सवाल पूछता रहा था कि क्या यह सपना है या हाक्किकत । क्योंकि वह कोई उल्का पिंड नहीं था, वह एक लडकी थी । बहुत खूबशुरात जो चमक रही थी । मेरे आँखे खुली कि खुली थी, न मैं हिल पा रहा था, न ही कुछ बोल पा रहा था । क्योंकि उसके हाथ मे हथीयार था जो कि खून से लतपत था ।

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वह मेरे तरफ बाढ रही थी, लेकिन अचनाक उसे चक्कर आ गयी और गिर पाडी । मैं सरकते हुए धीरे से उसके पास पहुंचा मेरे बहुत सोचने के बाद उसे मैं अपने घर ले आया । मैंने कभी नहीं सोचा था कि इतनी खूबशुरात लडकी को अपने हाथों से उठाने का मौका मिलेगा । उस रात सोने मे बैचायनी हो रहा था, उसे हि शूबाह तक देखता रहा ।

शूबह जब उसे होश आयी तो वह कफी डारी हुई थी, शायद हमला करती तो, कफी घायल कर देती । वैसे भी मैं पहले से ही उसके प्यार में घायल हुआ था । उसने अपने बारे मे बताई कि वह ब्राम्हाण्ड का रखवाली है जो कि ब्राम्हाण्ड को खतरों से बचाती है । बिशाल महादनाव से लढते हुए वह पृथ्वी पर आ गिरी कुछ दिन के पश्चात उसके दोस्त उसे ढूंड लिए और उसे ले गये ।

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 कभी कभी जब मैं उस पल को याद करता हूँ, अगर उसके साथ मेरे रिश्ता बन जाती तो पता नहीं yeh rishta kya kehlata और मै अपने आपसे सवाल पूछता कि  कैसे क्यों yeh rishta kya kehlata hai.

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